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Indo-Pak Chamliyal Mela: बाबा चमलियाल की मजार पर 23 जून को लगेगा मेला, सरहद पार भी मन रहा जश्न, बज रहे ढोल

Mon, 20 Jun 2022 03:26 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/सांबा

सार

बाबा दलीप सिंह मन्हास को बाबा चमलियाल कहा जाता है। उनकी याद में सरहद के इस तरफ 23 जून को मेला लगना है। अभी से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। सूफी गायकी से बाबा को याद किया जा रहा है। दुकानें सजने लगी हैं। बच्चों के लिए झूले लगाए जा रहे हैं। 
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Baba Chamliyal Mela - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाकिस्तान जीरो लाइन बॉर्डर पर ये मजार हिंदू राजपूत बाबा दलीप सिंह मन्हास की है, लेकिन इसे मुकद्दस मानने वालों में मजहब का कोई दायरा नहीं। 300 साल पहले आम लोगों को चर्म रोग से निजात दिलाकर हर दिल अजीज बने बाबा दलीप सिंह मन्हास को बाबा चमलियाल कहा जाता है। उनकी याद में सरहद के इस तरफ 23 जून को मेला लगना है। 
अभी से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। सूफी गायकी से बाबा को याद किया जा रहा है। दुकानें सजने लगी हैं। बच्चों के लिए झूले लगाए जा रहे हैं। 

उधर, सरहद पार पाकिस्तान में भी जश्न का माहौल है। पाकिस्तान के सैंदावली गांव में एक हफ्ते तक मेला लगता है। दिन-रात सुनाई दे रही ढोल की थाप और स्वरलहरियां जश्न की गर्मजोशी बयान कर रही हैं।

कोरोना महामारी की पाबंदियों में दो साल मेला नहीं लग सका। इसलिए इस बार सांबा जिले के रामगढ़ में बाबा चमलियाल की मजार दोगुने इंतजामों की गवाह बन रही है।
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Baba Chamliyal Mela - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन और चमलियाल कमेटी के सदस्य मेले को यागदार बनाने में जुटे हैं। माना जाता है कि अपनी रुहानी ताकत से बाबा मिट्टी के लेप से चमड़ी के रोग झट से ठीक कर दिया करते थे। कुछ शरारती तत्वों को बाबा की नेकदिली रास नहीं आई और उनकी हत्या कर दी गई। 

किवंदती है कि सिर सैंदावली में गिरा जो अब पाकिस्तान में है। बाबा का धड़ मुस्लिम बहुल चमलियाल में रह गया, जहां बाबा की मजार बना दी गई। बाबा को मानने वालों की कई पुश्तों ने दोनों जगह मेले आयोजित किए। विभाजन ने सैंदावली को चमलियाल से अलग कर दिया, लेकिन बाबा की याद में मेले की रिवायत दोनों तरफ बरकरार रही। चमलियाल से मुस्लिम समुदाय के लोग पाकिस्तान जा चुके हैं, लेकिन यहां बाबा की मुकद्दस मजार पर हर बरस मेले लगते हैं।
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Baba Chamliyal Mela - फोटो : अमर उजाला
बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि सैंदावली में भी बाबा चमलियाल मेले की धूम है। उस तरफ लगातार ढोल की थाप और स्वरलहरियां गूंज रही हैं। सरहद के इस इस तरफ पहले इस मेले को बीएसएफ आयोजित करती थी। अब प्रशासन और कमेटी भी इसे आयोजित करते हैं।

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Baba Chamliyal Mela - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों को लंगर का प्रसाद बांटा
चमलियाल बाबा की दरगाह में रविवार को भंडारा लगाया गया। इसमें मजार पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं व आसपास के गांवों के ग्रामीणों को लंगर का प्रसाद बांटा गया। बाबा की मजार की सेवा में जुटे युवा सेवादारों की ओर से मेले को सफल बनाने के लिए दिन रात सेवा की जा रही है। श्रद्धालुओं के जूठे बर्तन साफ करने में भी युवा सेवादार आगे हैं।
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Baba Chamliyal Mela - फोटो : अमर उजाला
आज फिर सजेगी सूफी गायकों की महफिल
चमलियाल में बाबा की मजार पर सोमवार को सूफी गायकों की एक बार फिर से महफिल सजाई जाएगी। इसमें जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त दूसरे प्रदेश से भी गायक भाग लेंगे। मेले को यादगार बनाने के लिए सूफी गायक बाबा चमलियाल की महिमा का गुणगान करेंगे।
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