Baba Chamliyal Mela
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प्रशासन और चमलियाल कमेटी के सदस्य मेले को यागदार बनाने में जुटे हैं। माना जाता है कि अपनी रुहानी ताकत से बाबा मिट्टी के लेप से चमड़ी के रोग झट से ठीक कर दिया करते थे। कुछ शरारती तत्वों को बाबा की नेकदिली रास नहीं आई और उनकी हत्या कर दी गई।
किवंदती है कि सिर सैंदावली में गिरा जो अब पाकिस्तान में है। बाबा का धड़ मुस्लिम बहुल चमलियाल में रह गया, जहां बाबा की मजार बना दी गई। बाबा को मानने वालों की कई पुश्तों ने दोनों जगह मेले आयोजित किए। विभाजन ने सैंदावली को चमलियाल से अलग कर दिया, लेकिन बाबा की याद में मेले की रिवायत दोनों तरफ बरकरार रही। चमलियाल से मुस्लिम समुदाय के लोग पाकिस्तान जा चुके हैं, लेकिन यहां बाबा की मुकद्दस मजार पर हर बरस मेले लगते हैं।