मैं 26 साल का हूं, लेकिन आज तक मैंने कभी अपने बुजुर्गों से ऐसी त्रासदी के बारे में न ही सुना और ना ही कभी देखा। हमारे होंजड़ गांव में कई मकान 35 से 40 वर्ष पुराने हैं, लेकिन खराब मौसम ने कभी ऐसी तबाही नहीं मचाई। दच्छन के होंजड़ में बादल फटने के साथ भारी मलबा और पत्थर लेकर आई बाढ़ में शायद ही कोई बचा होगा, क्योंकि हमारे गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर ही दरिया बह रहा है जो चिनाब में जाकर मिलता है। ऐसी आशंका है कि मलबे के साथ आई बाढ़ में सभी लोग दरिया में गिर गए होंगे। जिससे उनके बचने की उम्मीद काफी कम है। किश्तवाड़ में होंजड़ त्रासदी से मौत के मुंह से निकले होंजड़ निवासी इमरान ने यह आपबीती सुनाई।
जीएमसी के डिजास्टर वार्ड में भर्ती इमरान को बीती रात के उस त्रासदी के मंजर के याद आते ही अपनों के खोने का गम हो रहा है। इमरान ने बताया कि होंजड़ में एक 50-60 फीट का नाला बह रहा है, जिसके दोनों तरफ घर बसे हैं।