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अनुच्छेद 370 और डोभाल का मिशन कश्मीर: घाटी आए और अपना काम कर गए, पढ़ें किस्सा उस गजब की प्लानिंग का

Thu, 24 Jun 2021 12:40 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, जम्मू
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अजीत डोभाल
साल 2019 में जुलाई महीना शुरू होते ही कश्मीर के साथ ही पूरे देश में गहमागहमी थी। तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं। घाटी के नेताओं का बार-बार एक ही सवाल था...आखिर क्या होने वाला है। क्या होने वाला है इसकी जानकारी तो केवल सरकार में बैठे चुनिंदा लोगों को ही थी। इन्हीं लोगों में से एक ऐसा नाम है जिनका प्लान तब पता चलता है जब उसे वह अंजाम दे देते हैं। वह कोई और नहीं बल्कि देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हैं।

एक सीक्रेट मिशन के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल श्रीनगर पहुंचे थे। श्रीनगर पहुंचने पर उन्होंने सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के आलाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर घाटी के मौजूदा हालात और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी हासिल की थी। दौरे को टॉप सीक्रेट रखा गया था और श्रीनगर पहुंचने से कुछ देर पहले ही संबंधित अधिकारियों को जानकारी देकर बैठक के बारे में बताया गया। पढ़िए कैसे डोभाल और सरकार ने बनाई रणनीति को अंजाम तक पहुंचाया...
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अजीत डोभाल
एनएसए ने तत्कालीन राज्यपाल के सलाहकार विजय कुमार, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, डीजीपी दिलबाग सिंह, आईजी एसपी पाणि से मुलाकात की थी। उनके साथ दिल्ली से आईबी के एक आलाधिकारी भी आए थे।
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अजीत डोभाल
उनके सीक्रेट मिशन पर घाटी में आने की चर्चा आम हुई तो अनुच्छेद 370 और 35-ए को हटाए जाने को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। प्लान इतना सीक्रेट था कि लोग भांप ही न पाए कि होगा क्या।


 

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अजीत डोभाल - फोटो : File Photo
राजनीतिक दलों में गहमागहमी थी। सबका बस एक ही सवाल था कि आखिर होगा क्या।
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अजीत डोभाल
एक बात करीब-करीब बिल्कुल साफ थी कि अमरनाथ यात्रा की समाप्ति का मतलब सरकार ने कुछ बड़ा प्लान कर रखा है। सूत्रों से ये जानकारी मिल रही थी कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा बदलाव करेगी। जिसका सीधे तौर पर ताल्लुक था अनुच्छेद-370 की समाप्ति।

आगे की स्लाइड में- अनुच्छेद 35-ए
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अनुच्छेद 35-ए के जरिये जम्मू-कश्मीर के निवासियों को स्टेट सब्जेक्ट मिलता था। यह अनुच्छेद गैर रियासती लोगों को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने, स्थायी तौर पर बसने और राज्य सरकार के अधीन किसी विभाग में नौकरी के अधिकार से वंचित करता था। यह अनुच्छेद राज्य विधानसभा को यहां के नागरिकों के लिए राज्य की स्थायी नागरिकता, उनके लिए राज्य सरकार के अधीनस्थ नौकरियां व अन्य विशेषाधिकारों को यकीनी बनाने का अधिकार देता था।
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