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कारगिल युद्ध की कहानी: भारतीय सेना के साहस के साथ-साथ इन हथियारों की मदद से जीता गया था कारिगल युद्ध

Wed, 07 Jul 2021 02:41 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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बोफोर्स तोप - फोटो : सोशल मीडिया
कारगिल युद्ध की जीत को विजय दिवस के रूप में मनाते हुए 20 साल पूरे हो गए। भारतीय सेना के अदम्य साहस और जांबाजी का डंका सारी दुनिया में बजा। लेकिन कारगिल की लड़ाई में हमारे रणबांकुरों की बाजुओं की ताकत के अलावा इस हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार भी थे जिन्होने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। साथ ही सेना के साहस और उनकी ताकत को दोगुना कर दिया।
77-B बोफोर्स - स्वीडन के साथ हुए बोफोर्स तोप सौदे को लेकर देश में काफी विवाद हुए। लेकिन इसी तोप ने अपना जलवा लड़ाई के मैदान में ऐसा दिखाया कि पाकिस्तानी फौजियों को अपनी पोस्ट छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। सेना भी इस जीत की बड़ी वजह 77-B  बोफर्स को ही मानती है। बोफोर्स तोप की बौछार की बदौलत सेना को कवर मिला और उसने लगातार आगे बढ़ते हुए घुसपैठियों को मार गिराया। बोफोर्स ने दुश्मनों के बंकरों को भारी नुकसान पहुंचाया और अपने जवानों को सुरक्षा कवच दिया। 30 किलोमीटर तक की अचूक वार करने वाली बोफोर्स 105mm के गोले,160mm और 120mm के मोर्टार, 122mm ग्रैड और BM 21 रॉकेट लॉन्चर से सीधा फॉयर करने में सक्षम है। इसके पाकिस्तानी सेना के 69 अधिकारी और नॉदर्न लाइट इनफैन्टरी के 772 जवान मारे गये। बोफोर्स के कहर बरपाते गोलों ने पाकिस्तानी सेना की रक्षा पंक्ति को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और 1000 सैनिकों को घायल कर दिया। बोफर्स  हमले की जिम्मेदारी 3 बहादुर अधिकारी और 69 सैनिकों को दी गई थी जिन्होने अपनी जांबाजी से सेना की रणनीतिक लड़ाई को अंजाम दिया।
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तोप
तोपें - भारतीय तोपों ने  2,50,000 गोले, बम और रॉकेट कारगिल की लड़ाई में दागे। लगभग 5,000 तोपें रोजाना गोले और बम दागती थीं, जबकि 300 बंदूकें मोर्टार से दुश्मन पर वार करती थीं। जिस दिन टाइगर हिल से पाकिस्तानी कब्जा हटाया गया सिर्फ उस दिन  9,000 गोले जवानों ने दागे।
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ड्रोन - फोटो : अमर उजाला
इस्रायल- इस देश की मदद के बिना भी भारत ये लड़ाई रणनीति बना कर नहीं लड़ पाता। इस्रायल ने सीमा सुरक्षा और आतंकरोध में अपने देश के तकनीकी और अनुभव को भारत के साथ बिना किसी समझौते के तहत किया। लेजर तकनीक का इस्तेमाल कर लड़ाकू विमान से मिसाइल के जरिए हमले में मदद की और ड्रोन से हवाई निगरानी कर दुश्मनों को खोज-खोजकर मार गिराने में भारतीय सेना की मदद की।

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फॉयर गन
फॉयर अटैक- 1 राउंड फायर प्रति मिनट के हिसाब से 17 दिन तक लगातार किये गये जो दुनिया की किसी भी लड़ाई में दूसरे विश्व युद्ध के बाद नहीं हुआ। इस घमासान में हमारे जवान ना खा पाते थे और ना सो पाते थे।
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मिग 21 - फोटो : Social Media
मिग 21- ऑपरेशन 'सफेद सागर' के तहत भारतीय वायु सेना ने थल सेना की मदद मिग 21 लड़ाकू विमान के जरिए की।
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फील्ड गन - फोटो : amar ujala
18 गन बैरल घिस गए- 286 मीडियम रेजिमेंट की इतिहास में ये पहली बार हुआ कि 18 गन बैरल सिर्फ 25 दिनों में फॉयर करते करते घिस गये। इसके बाद भी रेजिमेंट रुका नहीं और 163 मीडियम रेजीडेंट से नये गन बैरल लेकर हमला ऑपरेशन जारी रखा।

यह भी पढ़ें- कारगिल युद्ध: तीन महीने पाक के साथ-साथ मौसम भी था दुश्मन, पढ़िए भारतीय सेना के हौसले की कहानी

 
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