'बहुत डर है यहां, रात को अपनी झुग्गी में बैठे थे। आपस में बातें करते हंस रहे थे। दो लोग (आतंकी) आए। दो फायर निकाले और भाग गए। जब हमने देखा तो दो साथी खून से लथपथ जमीन पर पड़े थे। हमारे एक साथी की मौत हो गई है और एक जख्मी है। अब हम नहीं रुकेंगे। हम वापस चले जाएंगे। ' यह बातें बडगाम के खांडा माग्रेपोरा इलाके में स्थित ईंट भट्ठे पर काम करने वाले एक कामगार मंजीत ने बताईं।
गुरुवार देर रात यहां आतंकियों ने दो गैर-कश्मीरी मजदूरों को अपना निशाना बनाया। इसमें एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे का इलाज अस्पताल में जारी है। घटना के बाद भट्टे पर मायूसी और डर का माहौल है। भट्टे पर दूसरे दिन सभी कामगारों के चेहरों पर घोर खामोशी दिखी। होगी भी क्यों नहीं उनके साथ काम करने वाले एक मजदूर की हत्या कर दी गई है और एक अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहा है।
झुग्गी में एक चारपाई , बिस्तर, कुछ कपड़े और एक जोड़ी चप्पल के सिवा कोई सामान नजर नहीं आया। कच्ची दीवारों पर तिरपाल लगा कर किसी तरह पानी और धूप से बचाव की कोशिश की गई है। इन हालातों में रह कर अपने परिवार का पेट पालने वालों को भी आतंकी नहीं बख्श रहे हैं। मजदूरों ने बताया कि आतंकी सीधा झुग्गी में दाखिल हुए, फायर किया और निकल गए। जैसे मानों उन्हें सब कुछ पहले से पता है कि कहां कौन है और उसे कैसे खत्म करना है।