वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के कब्जे से टाइगर हिल को मुक्त करवाते समय उधमपुर निवासी जांबाज सिपाही रतन चंद शहीद हुए थे। उनकी शहादत को आज भी लोग याद करते हैं। शहीद के बच्चों का कहना है कि उनको अपने पिता की शहादत पर नाज है। पत्नी ने बताया कि पति ने कारगिल से पत्र भेजा था, जोकि उनको पति के शहीद होने के बाद मिला था।
शहीद की पत्नी सुषमा देवी ने बताया कि पति रतन चंद 1987 में सेना की 18 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे। उन्होंने कमांडो प्रशिक्षण लिया था। 1999 में जब पाकिस्तान सेना ने कारगिल के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया तो उसके पति की बटालियन को टाइगर हिल को पाकिस्तानी सेना से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पांच जुलाई को दुश्मनों से लोहा लेते हुए पति शहीद हो गए थे। शव न मिलने पर पहले सेना ने बताया कि उसका पति लापता हो गया है। लेकिन कुछ दिनों के बाद सेना ने सूचित किया किया पांच जुलाई को रतन चंद दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए हैं।