पद्मावती पर विवाद जारी है। संजय लीला भंसाली की इस फिल्म के कथानक को लेकर आक्रोश है। इतिहासकारों की मानें तो चित्तौड़गढ़ में पद्मावती के जौहर के बाद अलाउद्दीन खिलजी रुका नहीं। उसने अपनी खीज मिटाने के लिए कहर जारी रखा। सबसे पहले उसने उस जगह का नाम बदला जहां उसने हमला किया था।
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हाथ में केवल राख ही राख
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डेमो इमेज
कहा जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में चित्तौड़ के किले पर आक्रमण किया और उस पर अधिकार कर लिया। राजा रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हुए और इसके बाद रानी पद्मिनी ने हजारों महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। खिलजी जब पद्मिनी को देखने पहुंचा तो उसे केवल राख ही मिली थी।
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बदल दिया चितौड़ का नाम
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बताया जाता है कि इसके बाद भी खिलजी नहीं रुका। उसने मानो चितौड़गढ़ को इतिहास से गायब करने की ठान ली थी। उसने कई राजपूत वीरों का कत्ल करवा दिया। खिलजी ने चितौड़गढ़ का नाम बदल दिया। उसने खिज्र खां के नाम पर चितौड़ का नाम खिज्राबाद कर दिया और दिल्ली लौट आया।
राजपूत को सौंपी जिम्मेदारी
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चित्तौड़ दुर्ग
इसके बाद राजपूतों ने चितौड़ को आजाद करवाने के लिए प्रयास जारी रखे। इस दौरान ही खिलजी ने दुर्ग की जिम्मेदारी एक राजपूत सरदार को सौंप दी। खिलजी की मौत के बाद हम्मीर देव ने हमला कर चितौड़ का आजाद करवा लिया।
गौरतलब है कि भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध शूटिंग से ही हो रहा है। भंसाली पर इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। इसकी कहानी को लेकर आपत्ति जताई गई। इसके बाद फिल्म को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। मामला बढ़ता देख कई राज्यों ने फिलहाल अपने यहां फिल्म रिलीज पर रोक भी लगा दी है।