जयललिता बेशक फिल्मी पर्दे और सियासत की बुलंदियों पर पहुंचीं। उन्हें जनता ने इतना सम्मान दिया कि उन्हें मां शब्द यानी 'अम्मा' से संबोधित किया। लेकिन उनके साथ एक ऐसा वाकया भी घटा जिसे वह कभी नहीं भूल पाईं। उस वाकये के दौरान उन्हें खुद की तुलना 'महाभारत की द्रौपदी' से करनी पड़ी। जयललिता जब सूबे में नेता प्रतिपक्ष थीं तब एक बार विधानसभा में उनके साथ इंसानियत शर्मसार करने वाली विधानसभा में शर्मनाक घटना घटी। उनके साथ डीएमके विधायकों ने छेड़खानी की। डीएमके विधायकों ने तकरीबन उन्हें निर्वस्त्र कर दिया था। वे फटी हुई साड़ी में मीडिया के सामने आईं और खुद साथ हुई वारदात की तुलना महाभारत काल की द्रौपदी के चीरहरण से की। इस पर उन्हें जनता की खूब सहानुभूति मिली थी।
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आखिर क्यों जयललिता को करनी पड़ी थी 'महाभारत की द्रौपदी' से अपनी तुलना, 5 अनकही बातें
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जयललिता के फिल्मी करियर का सबसे सुनहरा दौर 1965 से 1980 के बीच रहा। इस दौरान वे सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाली अदाकाराओं में से एक बन गई थीं। उन्होंने कई तमिल और तेलुगू फिल्मों में काम किया।
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उन्होंने एकमात्र हिंदी फिल्म 'इज्जत' में काम किया। इसमें फिल्म में उनके साथ हीरो बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र थे। यह फिल्म 1968 में आई थी।
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मीडिया रिपोर्टों पर यकीन करें तो जयललिता ऐसी मुख्यमंत्री रहीं जिन्होंने महज एक रुपये की सैलरी पर काम किया।
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जयललिता का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने कभी शादी नहीं की। उनकी मां तमिल सिनेमा की लोकल ड्रामा कंपनियों में काम करती थीं। जयललिता भी अपनी मां के नक्शेकदम पर चलीं। उन्होंने फिल्मी करियर की शुरुआत बाल अभिनेत्री के तौर पर की। 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मुख्य अभिनेत्री के तौर पर कन्नड़ फिल्म चिनाडा गोम्बे में काम किया। यह फिल्म हिट रही थी।
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