अबूधाबी में बना पहला हिंदू मंदिर।
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महंतस्वामी महाराज ने कागज पर लिखे थे अपने मन के भाव
“आज वसंत पंचमी का उत्सव है। यह हमारे गुरु शास्त्रीजी महाराज की जयंती है। यह अबूधाबी के भव्य और दिव्य मंदिर में मूर्तिप्रतिष्ठा का उत्सव है। मैं आपको हर दिन याद करता हूं और आज भी याद करता हूं। आपकी सेवा भुलाई नहीं जाती। जब मैं प्रतिष्ठा की आरती कर रहा था तो आप सभी को याद कर रहा था। मेरे मन आप सभी भी प्रमुखस्वामी महाराज द्वारा निर्मित भव्य और दिव्य अक्षरधाम हैं क्योंकि आप अक्षरपुरुषोत्तम के सच्चे भक्त हैं, नियम धर्म का पालन करते हैं और सेवा करते हैं। आपका मन अबूधाबी मंदिर में है और मेरा मन आप में है। आपकी जय हो, आपकी जय हो।”