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रेजांग ला: 20-20 चीनियों पर भारी पड़ा एक भारतीय सिपाही, पीएम मोदी ने भी किया बहादुरी का जिक्र

Fri, 03 Jul 2020 03:55 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत चीन युद्ध - फोटो : Social Media
चीन के साथ सीमा विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह अचानक लेह पहुंच गए। सीमा की अग्रिम चौकी पर पहुंचकर उन्होंने दुश्मन के सामने सीना तानकर डटे हमारे जवानों का हौसला बढ़ाया। अपने भाषण में उन्होंने भारतीय जवानों की बहादुरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लेह, लद्दाख से लेकर सियाचिन और करगिल तक...गलवां का बर्फीला पानी, हर पर्वत, इसकी हर चोटी भारतीय जवानों की बहादुरी की गवाह है।  



पीएम मोदी ने इस दौरान रिजांग ला का भी जिक्र किया। 1962 में यहीं पर मेजर शैतान सिंह ने यहां अपनी बहादुरी का परिचय दिया था। 1962 का नवंबर महीना, बर्फ से ढकी लद्दाख की चुशुल घाटी उस समय तोप के गोलों और गोलियों की आवाजों से गूंज उठी जब भारतीय सेना के 120 जवानों पर चीनी सेना के लगभग छह हजार सैनिकों ने हमला कर दिया।
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चीन के सैनिकों का सामना करते भारतीय वीर सिपाही - फोटो : सोशल मीडिया
कड़ाके की ठंड के बीच चीनी सेना ने लद्दाख के रेजांग ला में घुसपैठ शुरू कर दी। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट 13 कुमाऊं के कंपनी लीडर मेजर शैतान सिंह के हाथों में थी।
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चीनी सेना पर नजर बनाए हुए भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
भारतीय सेना ने इस युद्ध में चीनी सैनिकों का मुकाबला मुख्य रूप से 303 राइफल के साथ किया था। कुछ सैनिकों के पास ही ऑटोमेटिक मशीनगन थी। अधिक ऊंचाई के कारण भारतीय सेना के पास एक भी भारी हथियार नहीं था जिससे चीनी सेना के आक्रमण का मुकाबला किया जा सके। सैनिकों के पास गर्म कपड़े तक नहीं थे। कई सैनिकों के पास जूते तक नहीं थे। गोलियां भी सीमित संख्या में थी।

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चीन युद्ध में इस्तेमाल की गई गाड़ी - फोटो : सोशल मीडिया
इस कंपनी की पोजीशन एक पहाड़ी के पीछे थी। उनकी सहायता के लिए पीछे से आर्टिलरी (तोप) से भी फायर नहीं किया जा सकता था। वहीं सामने से वे दुश्मन के तोपों के निशाने पर थे।
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चीनी सैनिकों के समाने खड़े भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
इस कंपनी के पास भीषण बर्फबारी में रहने लायक कपड़े तक नहीं थे। माइनस में तापमान होने के कारण भारतीय सेना के अधिकतर हथियारों से फायर तक नहीं हो पा रहा था। लेकिन उन्होंने चीनी सेना के सामने समर्पण करने के बजाए युद्ध करने का फैसला किया।
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पहाड़ी इलाकों में गश्त करती भारतीय सेना - फोटो : Social Media
अपने अदम्य साहस और बहादुरी के लिए प्रसिद्ध भारतीय सेना के इन बहादुर जवानों ने चीनी सैनिकों की संख्या और उनके आधुनिक हथियारों की परवाह न करते हुए रेजांग ला को उनकी कब्रगाह बना दिया। 
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अस्थाई कैंप बनाकर इलाके की रक्षा करते भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
मेजर शैतान सिंह की कंपनी ने आखिरी आदमी, आखिरी राउंड और आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी। अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए 13 कुमाऊं के 120 जवानों ने चीनी सेना के 1300 सैनिकों को मार गिराया।

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भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गोलीबारी - फोटो : Social Media
चीन की बड़ी सेना के सामने भारतीय सेना के इन वीर सिपाहियों ने आखिरी गोली तक लड़ाई की। इस दौरान मातृभूमि की रक्षा करते हुए 114 सैनिक शहीद हो गए जबकि छह सैनिकों को चीनी सेना ने बंदी बना लिया। 

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सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
लेकिन, बंदी बनाए गए सभी सैनिक चमत्कारिक रूप से चीनी सेना के चंगुल से बचकर निकल गए। बाद में इस सैन्य टुकड़ी को पांच वीर चक्र और चार सेना पदक से सम्मानित किया गया था।

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मेजर शैतान सिंह
अपने अदम्य साहस और नेतृत्व कौशल के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। 
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रेजांग ला - फोटो : Map
रेजांग ला लद्दाख में चुशुल घाटी में एक पहाड़ी दर्रा है। 1962 के युद्ध में 13 कुमाऊं दस्ते का यह अंतिम मोर्चा था। इसे रेजांग ला युद्ध के नाम से जाना जाता है।
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