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NCRB Report: देश में छात्रों की आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र-तमिलनाडु का बुरा हाल; रिपोर्ट में खुलासा

Thu, 29 Aug 2024 08:27 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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NCRB - फोटो : Amar Ujala
भारत में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। आलम यह है कि छात्रों की आत्महत्या की दर समग्र आत्महत्या प्रवृत्तियों की दर से तो अधिक है ही, अब यह जनसंख्या वृद्धि दर को पार कर गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर 'छात्र आत्महत्या: भारत में फैलती महामारी' रिपोर्ट बुधवार को वार्षिक आईसी-3 सम्मेलन में जारी की गई। 

रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश वो राज्य हैं, जहां छात्र सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं। यहां जितने छात्र आत्महत्या करते हैं वह देश में होने वाली कुल आत्महत्याओं का एक तिहाई है, जबकि अपने उच्च शैक्षणिक वातावरण के लिए जाना जाने वाला राजस्थान 10वें स्थान पर है, जो कोटा जैसे कोचिंग केंद्रों से जुड़े गहन दबाव को दर्शाता है।
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NCRB - फोटो : Amar Ujala
प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की वृद्धि
रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां आत्महत्या की घटनाओं की संख्या में प्रतिवर्ष दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि छात्र आत्महत्या के मामलों की कम रिपोर्टिंग होने की संभावना है। पिछले दशक में 0-24 वर्ष की आयु के बच्चों की जनसंख्या 58.2 करोड़ से घटकर 58.1 करोड़ हो गई, जबकि छात्र आत्महत्याओं की संख्या 6,654 से बढ़कर 13,044 हो गई।
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NCRB - फोटो : Amar Ujala
जान देने वाले विद्यार्थियों में 53% छात्र
आईसी3 इंस्टीट्यूट की ओर से संकलित रिपोर्ट में बताया गया, 2022 में कुल छात्र आत्महत्या के मामलों में 53 प्रतिशत पुरुष छात्रों ने खुदकुशी की। 2021 और 2022 के बीच, छात्रों की आत्महत्या में छह प्रतिशत की कमी आई जबकि छात्राओं की आत्महत्या में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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NCRB - फोटो : Amar Ujala
पिछले दशक में छात्राओं में 61% बढ़ी घटनाएं
रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक में छात्र आत्महत्याओं में 50 और छात्राओं में 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले पांच वर्षों में दोनों में औसतन 5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है। एनसीआरबी के आंकड़े पुलिस की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी रिपोर्ट (एफआईआर) पर आधारित है। हालांकि, यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि छात्रों की आत्महत्या की वास्तविक संख्या संभवतः कम रिपोर्ट की गई है। इस कम रिपोर्टिंग के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं, जिसमें आत्महत्या से जुड़ा सामाजिक कलंक और भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के तहत आत्महत्या के प्रयास और सहायता प्राप्त आत्महत्या का अपराधीकरण शामिल है।
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मामले की जांच में जुटी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
आईसी3 संस्थान के बारे में जानिए
आईसी3 संस्थान एक स्वयंसेवी आधारित संगठन है, जो दुनिया भर के उच्च विद्यालयों को उनके प्रशासकों, शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण संसाधनों के माध्यम से सहायता प्रदान करता है ताकि मजबूत करियर और कॉलेज परामर्श विभागों की स्थापना और रखरखाव में मदद मिल सके।
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