संख्या और शक्ति में भारतीय सेना को दुनिया की सबसे श्रेष्ठतम सेनाओं में गिना जाता है। जिसके शौर्य के चर्चे विश्वभर में होते हैं। भारतीय सेना अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए एक से बढ़कर एक घातक राइफलों का प्रयोग करती है। जानिए उनके बारे में-
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indian army
- फोटो : अमर उजाला
इंसास राइफल
इंसास राइफल वर्तमान में सेना में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इंसास का पूरा नाम Indian New Small Arms System है। इस भारतीय राइफल को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने बनाया है।
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- फोटो : अमर उजाला
एके 47 राइफल
एके सीरिज की विभिन्न राइफलों का प्रयोग विश्व के कई देशों की सेनाएं करती हैं। इसमें भारत भी शामिल है। यह राइफल सेमी ऑटोमेटिक और फूली ऑटोमेटिक मोड में फायर करने में सक्षम है। यह एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग कर सकती है।
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एके-203
- फोटो : SELF
एके 103 और 203 राइफल
भारतीय सेना वर्तमान में एके 103 राइफल का प्रयोग करती है। इसके अलावा एके सीरिज की 203 राइफल्स के उत्पादन के लिए अमेठी में कारखाना लगाया गया है। यह कारखाना रूस के सहयोग से निर्मित किया गया है। इस राइफल में नाइट विजन के साथ टेलिस्कोपिक लेंस भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसमें अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर का भी प्रयोग किया जा सकता है।
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ड्रेगुनोव स्नाइपर राइफल
ड्रेगुनोव स्नाइपर राइफल
सोवियत रूस में बनी इस स्नाइपर राइफल का प्रयोग शीत युद्ध के दौरान किया जाता था। इस राइफल में 7.62×54 मिलीमीटर का कॉर्टरेज प्रयोग किया जाता है। इसमें 10 राउंड की मैगजीन बॉक्स का प्रयोग किया जाता है। इस राइफल की प्रभावी रेंज 800 से 900 मीटर तक मानी जाती है।
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एसएएफ कार्वाइन 2ए1
एसएएफ कार्बाइन 2ए1
यह बंदूक सब मशीन गन 1ए1 का साइलेंस वर्जन है। जिसमें बैरल में साइलेंसर फिट किया साथ लगाया गया है। यह कानपुर में आयुध निर्माणी द्वारा बनाया गया है। यह एक हल्के वजन का हथियार है और स्वचालित फायरिंग में सक्षम है। यह 150 राउंड प्रति मिनट की दर से फायरिंग कर सकता है। इसका उपयोग ज्यादातर आतंकवादी हमलों का मुकाबला करने के लिए विशेष बलों द्वारा किया जाता है। SAF कार्बाइन 2A1 का उपयोग भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो या MARCOS द्वारा किया जाता है।
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टावोर
आईएमआई टॉवोर टार 21 राइफल
इस राइफल का उपयोग मार्कोज, गरुड़, पैरा रेजीमेंट, सीआरपीएफ और अन्य विशेष बल करते हैं। यह राइफल इजरायल मूल की है।
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एनएसवी हैवी मशीनगन
एनएसवी हैवी मशीन गन
सोवियत निर्मित इस मशीन गन का निर्माण आयुध कारखानों बोर्ड के आयुध निर्माणी तिरुचिरापल्ली में किया गया है।
भारतीय सेना सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल ऑटो 9 एमएम 1ए का प्रयोग करती है। इसके अलावा सीआरपीएफ, राज्य पुलिस भी इस हथियार का इस्तेमाल करती है। इसमें सामान्यत: 13 राउंड की मैगजीन प्रयोग की जाती है। इसका उत्पादन लाइसेंस के तहत राइफल फैक्ट्री इसापोर में किया जाता है।