टाटा संस को 68 साल बाद एक बार फिर एयर इंडिया का मालिकाना हक वापस मिल गया है। कंपनी ने नीलामी में 18 हजार करोड़ रुपये की बोली लगाकर एयर इंडिया पर मालिकाना हक हासिल कर लिया। इस एयरलाइन की शुरुआत जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस के तौर पर की थी। आजादी के बाद उड्डयन सेवाओं के राष्ट्रीयकरण के बाद इसका नाम बदलकर एयर इंडिया जरूर कर दिया गया, लेकिन जेआरडी का अपनी एयरलाइंस से प्यार कभी कम नहीं हुआ। वे 80 के दशक तक एयर इंडिया से जुड़े रहे और एयर इंडिया की बेहतरी के लिए काम करते रहे...
टाटा एयरलाइंस का जन्म ही जेआरडी टाटा के उड्डयन क्षेत्र के प्रति प्यार के चलते हुआ था। वे भारत में पहली विमानन कंपनी शुरू करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पहले भारतीय थे, जिन्हें फ्लाइंग लाइसेंस मिला था। जेआरडी टाटा 24 साल के थे, जब उन्होंने बॉम्बे में खुले फ्लाइंग क्लब की सदस्यता ली। वे इस क्लब में रजिस्टर करने वाले पहले शख्स नहीं थे, लेकिन 1929 में यहां से फ्लाइंग लाइसेंस लेकर निकलने वाले पहले व्यक्ति जरूर बने।
15 अक्टूबर 1932। यह वो तारीख थी, जब जेआरडी टाटा ने भारतीय इतिहास की पहली फ्लाइट उड़ाई। उनकी यह उड़ान एक पुस मॉथ विमान में थी, जिसे उन्होंने कराची के ड्रिघ रोड एयरोड्रोम से मुंबई की जुहू एयरस्ट्रिप तक उड़ाया था। जेआरडी टाटा ने बाद में कहा था कि उनकी इस फ्लाइट ने ही एयर इंडिया और फिर एयर इंडिया इंटरनेशनल को आगे बढ़ाया।
एयर इंडिया के सरकारी हाथों में जाने के बावजूद जेआरडी टाटा लंबे समय तक इस एयरलाइंस के प्रबंधन का काम देखते रहे। कई बार जेआरडी टाटा को अपनी फ्लाइट्स में सफर करते देखा जाता था।
वे इन फ्लाइट्स में खुद नोट्स लिखते थे और तय करते थे कि क्या ठीक किया जाना बाकी है, यात्रियों को किस तरह की वाइन दी जा रही है। एयर होस्टेस का बर्ताव कैसा है, उन्होंने कौन सी साड़ी पहनी है, यहां तक कि उनके बालों का स्टाइल कौन सा है।
एयरलाइंस के प्रति अपनी इसी प्रतिबद्धता की वजह से जेआरडी के कार्यकाल में एयर इंडिया की गिनती सबसे बेहतरीन एयरलाइंस सेवाओं में होती थी। जेआरडी टाटा ने 1932 की अपनी यादगार पहली उड़ान को 50 साल पूरे होने के बाद 1982 में फिर दोहराया। इस बार उन्होंने फिर कराची से बॉम्बे के लिए उड़ान भरी थी।