मुंबई से अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से भी तेज 500 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन चलाने के लिए भारतीय रेलवे ने विदेशी प्राइवेट कंपनियों को आमंत्रित किया है।
सिविल एविएशन सेक्टर की तर्ज पर रेलवे प्राइवेट कंपनियों के साथ काम करने को तैयार है। ताकि प्राइवेट एयरलाइंस की तरह भारत में भी प्राइवेट रेल चलाई जा सके।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक ये ट्रेनें मैग्नेटिक लेविटेशन (मैग्लव) तकनीक पर चलाई जाएगी। इस तकनीक में बहुत तेज रफ्तार पर ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। इन ट्रेनों की न्यूनतम रफ्तार 350 किमी प्रति घंटा है।
मौजूदा समय में मैग्लव टेक्नोलॉजी पर आधारित ट्रेनें जापान, चीन और जर्मनी में चलाई जा रही हैं। रेलवे ने इस संबंध में दिलचस्पी दिखाते हुए प्राइवेट कंपनियों से 6 सितंबर से पहले आवेदन मांगा है। प्रोजेक्ट का मॉडल और विनिर्देश बाद के चरणों में तय किए जाएंगे।
सरकार ने मैग्लव प्रोजेक्ट को अभी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर प्रस्तावित किया है। इसके तहत सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी और प्राइवेट कंपनियों को प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारते हुए मैग्लव ट्रेनें चलानी होंगी।
रेलवे मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के सापेक्ष में देखा जा रहा है। इसके तहत रेलवे को हाई स्पीड ट्रेनों के दौर में ले जाना है। दूसरी ओर रेल मंत्रालय बुलेट ट्रेनों के कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। इसमें हाई स्पीड, सेमी हाईस्पीड ट्रेनें भी शामिल हैं। हालांकि मैग्लव ट्रेनों का अनुभव बिल्कुल अलग होगा।
यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि रेलवे अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाने की खातिर बाहरी स्त्रोत तलाश रहा है। रेलवे को रोड और हवाई क्षेत्र से मजबूत चुनौती मिल रही है। इससे रेलवे का ट्रैफिक कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2015-16 के लिए रेलवे को 45,384 करोड़ का राजस्व पैसेंजर ट्रैफिक से मिला, जबकि रेलवे का लक्ष्य 50,175 करोड़ का था। वहीं इस वित्त वर्ष के लिए रेलवे का टारगेट 51,012 करोड़ का है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय लेवल पर कनेक्टिविटी बेहतर होने से रेल ट्रैफिक आगे चलकर कम हो सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए रेलवे ने प्राइवेट कंपनियों के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य रेल नेटवर्क बनाने की योजना बनाई है।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसके लिए चार रूट तय किए गए। इनमें बेंगलुरु-चेन्नई, हैदराबाद-चेन्नई, नई दिल्ली-चंडीगढ़ और नागपुर-मुंबई तय किए गए हैं। मौजूदा समय ये रूट बेहद व्यस्त हैं और मैग्लव ट्रेनें यात्रियों के लिए बड़ी राहत होगी।
प्रस्ताव के मुताबिक भारत सरकार 200 से 500 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराएगी, जबकि कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाली कंपनी को मैग्लव ट्रेन को डिजाइन करना होगा और एलिवेटेड ट्रैक बनाना होगा। हालांकि यह सब तभी संभव होगा जब कंपनियां 10 से 15 किमी की दूरी में मैग्लव ट्रेन का सफल प्रजेंटेशन देंगी। सरकार का प्रस्ताव कहता है कि वैश्विक स्तर पर कुछ ही देशों के पास मैग्लव तकनीक है। इनमें जर्मनी, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका शामिल है।
चीन में मैग्लव ट्रेनें शंघाई शहर और एयरपोर्ट के बीच चलाई जाती है, जोकि 38 किलोमीटर की दूरी तय करती है। मैग्लव ट्रेनों को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए सरकार प्राइवेट कंपनियों को ला सकती है। इनमें इंटरनेट, फूड और अन्य सेवाओं के लिए यात्रियों से पैसे लिए जाएंगे।