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हरियाणा: सीटें कम, फीस ज्यादा, डॉक्टर बनने के लिए विदेश जाने को मजबूर, जानिए प्रदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई का हाल

Mon, 14 Mar 2022 01:36 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
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यूक्रेन और चीन में हरियाणा से आधी फीस में हो रही एमबीबीएस की पढ़ाई - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में अन्य प्रदेशों से भी अधिक फीस है। इसलिए अच्छी रैंक होने के बावजूद उनको दूसरे देश या फिर अन्य प्रदेशों में कोर्स के लिए जाना पड़ रहा है। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन, रूस, चीन, फिलीपींस, कजाकिस्तान, जार्जिया, किर्गिस्तान, नेपाल और मलयेशिया में विद्यार्थी जाते हैं। हरियाणा में महंगी हुई एमबीबीएस की फीस का असर है कि पिछले एक साल में प्रदेश के विद्यार्थियों ने यूक्रेन और चीन का रुख किया है। अकेले यूक्रेन में ही पिछले साल यहां से 500 से अधिक बच्चे एमबीबीएस करने गए। इसी प्रकार हर साल चीन में भी युवा कोर्स के लिए जा रहे हैं। इन देशों में 16 से 25 लाख में यह डिग्री पूरी हो जाती है। जबकि प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसकी फीस करीब 40 लाख रुपये तक पड़ती है। निजी कॉलेजों में तो 1 करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये तक वसूले जाते हैं। 

पहले हरियाणा में एमबीबीएस की फीस सालाना 53 हजार रुपये होती थी। वर्ष 2020 में नई पॉलिसी तय कर मनोहर सरकार ने कई गुना बढ़ोतरी कर एक साल की फीस करीब 10 लाख रुपये तय कर दी। नई पॉलिसी लागू होने के चलते अब काफी संख्या में टॉपर बच्चे भी सस्ती पढ़ाई के लिए राज्य में दाखिला न लेकर दूसरे प्रदेशों या फिर विदेश जा रहे हैं। अकेले यूक्रेन में ही 2000 से अधिक बच्चे एमबीबीएस कर रहे थे, जो रूस के हमले के बाद यूक्रेन से लौटे हैं। बच्चों के विदेश जाने से  प्रदेश का पैसा भी बाहर जा रहेा है।  हालांकि, प्रदेश सरकार की ओर से एमबीबीएस कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए लोन की व्यवस्था की गई है। यदि अभ्यर्थी पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करके सरकारी नौकरी के लिए चयनित हो जाता है, तब सरकार उसके लोन की किस्तें भरेगी। इसमें मूल और ब्याज सब शामिल होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विदेश में पढ़ने वाले छात्र बोले ‘पॉलिसी पर विचार करे सरकार’
यूक्रेन में पढ़ने वाले अमित, रोहित ने बताया कि हरियाणा में अन्य प्रदेशों से भी अधिक फीस है। इसलिए अच्छा रैंक होने के बावजूद उनको दूसरे देश या फिर प्रदेशों में कोर्स के लिए जाना पड़ रहा है। वहीं, दूसरे राज्यों में पढ़ रहे तरुण और अमृत ने कहा कि प्रदेश सरकार को इस पॉलिसी पर दोबारा से विचार करना चाहिए। साथ ही निजी कॉलेजों की फीस पर भी नियंत्रण किया जाए। यहां पर एक करोड़ तक रुपये लिए जा रहे हैं।

13 मेडिकल कॉलेज, 1850 सीटें
हरियाणा में 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इनके अलावा, एक सरकारी सहायता प्राप्त और सात निजी मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश में कुल 1850 सीटें हैं। हालांकि, प्रदेश में हर साल लाखों की संख्या में युवा नीट का पेपर देते हैं। मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि बाहर जाने वाले अधिकतर वे विद्यार्थी होते हैं जिनकी रैंक कम होती है या फिर अच्छी रैंक होने के बावजूद अर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती।

2025 तक 3035 होंगी एमबीबीएस सीटें 

हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज हो। इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। पहले के मुकाबले एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाई गई हैं। प्रधानमंत्री निजी मेडिकल कॉलेजों से फीस कम करने के लिए अपील कर चुके हैं, ताकि युवाओं को पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े। वर्ष 2025 तक 3035 एमबीबीएस सीटें होंगी। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।

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अग्रोहा मेडिकल कॉलेज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पढ़ाई इतनी महंगी कि कर्ज लेना पड़ रहा, हिसार मंडल के एकमात्र मेडिकल कॉलेज में 100 ही सीटें
हिसार मंडल के पांच जिलों के विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा के लिए केवल एक कॉलेज हिसार के अग्रोहा में है। यहां भी एमबीबीएस की 100 सीटें ही उपलब्ध हैं। हिसार जिले में तीन यूनिवर्सिटी होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज की संख्या को विस्तार नहीं दिया जा सका। जिस कारण भावी चिकित्सकों को कर्ज का बोझ उठाकर मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 

राज्य बजट में घोषणा के बावजूद सिरसा, भिवानी, फतेहाबाद और चरखी दादरी जिले में अभी मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा नहीं
राज्य बजट में हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा के बावजूद सिरसा और भिवानी जिले में अभी मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। चरखी दादरी और फतेहाबाद जिले में अभी मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रक्रिया फाइलों में भी शुरू नहीं हुई है।

मेडिकल साइंस के 12वीं पास 30% छात्रों को ही मिल पा रहा एमबीबीएस में दाखिला
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से बीते साल 12वीं कक्षा की साइंस परीक्षा में 33749 विद्यार्थी पास हुए थे। इसी तरह सीबीएसई से भी हजारों विद्यार्थी पास हुए। मेडिकल कॉलेज में सीटें कम होने की वजह से हजारों विद्यार्थी दाखिला नहीं ले पाते। हिसार जिले से हर साल करीब 5 हजार विद्यार्थी मेडिकल साइंस से 12वीं पास करते हैं। इसमें 95 प्रतिशत का लक्ष्य एमबीबीएस में दाखिला होता है।

केवल 25 से 30 विद्यार्थियों का ही एमबीबीएस में दाखिला हो पाता है। एमबीबीएस में दाखिले के लिए हिसार के विद्यार्थी दिल्ली, राजस्थान के कोटा में कोचिंग के लिए जाते हैं। कुछ अभिभावक बच्चों को एमबीबीएस में दाखिले के लिए आठवीं-नौवीं कक्षा से ही कोचिंग दिलाना शुरू कर देते हैं। सिरसा जिले से भी हर साल करीब 10 हजार विद्यार्थी मेडिकल के निकलते हैं। वहीं, भिवानी जिले में बीते साल हरियाणा बोर्ड से करीब चार हजार साइंस के विद्यार्थी थे। इसी तरह सीबीएसई बोर्ड से करीब 1300 विद्यार्थियों ने मेडिकल संकाय से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। पंडित नेकीराम शर्मा के नाम से बनने वाला मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन है। 

उधर, फतेहाबाद जिले में हर साल एक हजार से अधिक विद्यार्थी मेडिकल की तैयारी करते हैं। इनमें से दस फीसदी विद्यार्थी यूक्रेन व चीन जैसे देशों में जाकर मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। मेडिकल संकाय से चरखी दादरी जिले में हर साल औसतन 700 विद्यार्थी स्कूली शिक्षा पूरी करते हैं। इन विद्यार्थियों के लिए जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा नहीं है। 

दूसरे देशों में एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों को इस डिग्री के बाद भारत आकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की एक परीक्षा पास करनी होती है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में विस्तार होना चाहिए। सरकार ने हर जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज खोलने का एलान किया हुआ है, जिसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए। - डॉ. राजकुमार नरवाल, करिअर काउंसलर एक्सपर्ट, हिसार

अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीसी की 100 सीट उपलब्ध हैं। इसमें नीट के माध्यम से दाखिले होते हैं। मेडिकल कॉलेज में एमडी तथा एमएस की 36 सीट उपलब्ध हैं। डीएनबी की 36 सीट पर दाखिले किए जा रहे हैं। इसके अलावा बीएससी नर्सिंग के कोर्स उपलब्ध है। - डॉ. अलका छाबड़ा, निदेशक, अग्रोहा मेडिकल कॉलेज हिसार

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पीजीआईएमएस रोहतक - फोटो : अमर उजाला
पीजीआईएमएस रोहतक में एमबीबीएस की 250 सीटें
रोहतक जिले में अनुमानित 20 हजार से अधिक विद्यार्थी हरियाणा व सीबीएसई बोर्ड से 12वीं की परीक्षा देते हैं। इसमें से साइंस के दो से तीन हजार विद्यार्थी होते हैं। मेडिकल शिक्षा का हब कहे जाने वाले रोहतक में पीजीआईएमएस में एमबीबीएस की 250 सीट, बाबा मस्तनाथ आयुर्वेद विवि में बीएएमएस की 60 सीट व पीजीआईडीएस में बीडीएस की 100 सीट हैं। इसके चलते अधिकांश विद्यार्थी हर साल विदेश में अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए जाने को मजबूर हैं।

देश प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की कमी है। मुख्यमंत्री ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। जिले ऐसा नहीं है। यह भी एक कोरी घोषणा बनकर रह गई। अब यूक्रेन से बच्चे वापस आए हैं, सरकार को चाहिए कि इनको प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में जगह मिले और इनको यही सेट किया जाए ताकि ये अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। - भारत भूषण बतरा, विधायक, रोहतक


महेंद्रगढ़ शिक्षा का हब पर मेडिकल कॉलेज नहीं
महेंद्रगढ़ जिला प्रदेश में शिक्षा का हब माना जाता है, लेकिन मेडिकल कॉलेज नहीं होने से छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ता है। शिक्षाविद राजेंद्र यादव ने बताया कि जिले से प्रति वर्ष 1500 से अधिक विद्यार्थी नीट क्वालीफाई करते हैं जिनमें 100 विद्यार्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल पाता है। औसतन 100 विद्यार्थी प्रति वर्ष यूक्रेन, रूस, चीन, यूएसएस, आस्ट्रेलिया आदि देशों में मेडिकल पढ़ाई के लिए जाते हैं। वहीं रेवाड़ी में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। सूत्रों के अनुसार मेडिकल के विद्यार्थी आसपास के शहरों व विदेशों में पढ़ाई कर रहे है। इसके अलावा जिले में विज्ञान संकाय में करीब 1037 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
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वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज, गिरावड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर : हर साल 500 विद्यार्थी दाखिले से रह जाते हैं वंचित, सरकारी मेडिकल कॉलेज की दरकार 
झज्ज जिले में वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज, गिरावड़ में है। इसमें एमबीबीएस की 100 सीटें हैं। हर साल करीब 500 विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह जाते हैं। जिले से 20 से 25 छात्र हर वर्ष मेडिकल पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। जिले में हर साल करीब 24 हजार बच्चे बारहवीं कक्षा पास करते हैं। हर साल करीब पांच से छह हजार बच्चे नीट की परीक्षा देते हैं। जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज न होने बच्चों को दूूसरे राज्यों, जिलों व विदेशों में जाकर मेडिकल की पढ़ाई करनी पड़ती है। 

झज्जर जिले में कोई भी सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है। विधानसभा में भी इस विषय पर सवाल लगाया गया था। सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। भाजपा के घोषणा पत्र में भी यह बात रखी गई है। सरकार की ओर से झज्जर जिले के साथ भेदभाव बरता जा रहा है। पहले भी विधानसभा के सत्र में यह मामला उठाया गया था। - गीता भुक्कल, विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री, झज्जर।

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बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत में एकमात्र मेडिकल कॉलेज दाखिले के लिए होती है मारामारी
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच पैदा हुए हालात के कारण यूक्रेन से मेडिकल के छात्र वतन लौट आए हैं। ये छात्र अब देश के कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई करना चाहेंगे। ऐसे में अब देश में एमबीबीएस कोर्स करने के लिए होड़ मचेगी।

सोनीपत जिले के गोहाना में गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 120 सीटें हैं। हर वर्ष मेडिकल कॉलेज के 21 विभागों में शामिल इन सीटों पर दाखिले के लिए मारामारी रहती है। ऐसे में हर साल करीब 500 छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री लेने के लिए विदेश का रुख करना पड़ता है।

जिले में हर वर्ष करीब 5000 विद्यार्थी नीट के लिए आवेदन करते हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज में मात्र 120 सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए फिर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी चयनित होते हैं। ऐसे में अधिकतर छात्रों को दाखिला नहीं मिल पाता। सोनीपत से एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन, रूस, चीन, फिलीपींस, कजाकिस्तान, जार्जिया, किर्गिस्तान, नेपाल और मलयेशिया में विद्यार्थी जाते हैं।

सरकार का चिकित्सा क्षेत्र पर नहीं ध्यान...
गोहाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक जगबीर मलिक ने कहा कि सरकार की तरफ से चिकित्सा क्षेत्र की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब तक भाजपा सरकार ने न कोई एम्स शुरू किया, न कोई मेडिकल कॉलेज या अन्य चिकित्सा संस्थान बनाए हैं। सरकार केवल मंदिरों के निर्माण कराने के साथ ही अन्य ऐसे मुद्दों को प्रमुखता दे रही है, जिनका फायदा युवाओं को नहीं मिल रहा है।

सीट बढ़वाने का करेंगे प्रयास
सोनीपत से भाजपा सांसद रमेश कौशिक का कहा जिले में एमबीबीएस की सीट बढ़वाने का प्रयास किया जाएगा। कुछ निजी एमबीबीएस कॉलेज भी जल्द खुलने की उम्मीद है। खानपुर मेडिकल कॉलेज में उत्कृष्ट विद्यार्थियों को न्यूनतम फीस पर एमबीबीएस कराई जा रही है। निजी कॉलेजों में भी उचित फीस पर एमबीबीएस की डिग्री दिलवाने का प्रयास किया जाएगा। यूक्रेन से लौट रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो सके। इसके लिए भी केंद्र सरकार हर संभव पहल करेगी।
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