पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। गांव गांव तक महामारी फैल रही है। ऐसे में हरियाणा के नारनौल का रूपसराय आजकल जिले के दूसरे गांवों के लिए नजीर बना हुआ है। 400 घरों वाले इस गांव में अभी तक कोई कोरोना संक्रमित नहीं मिला है। ऐसा गांव में लोगों की जागरूकता के चलते संभव हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का भी मानना है कि इस गांव के लोगों ने सही समय पर सही कदम उठाए हैं। न तो किसी बाहरी आदमी को यहां आने दिया जाता है और न ही बिना काम के किसी ग्रामीण को बाहर जाने देते हैं। गांव के अंदर की गई व्यवस्थाओं को देख हर कोई तारीफ कर रहा है। गांव के युवाओं ने एक कमेटी बना रखी है। ये कमेटी प्रतिदिन युवाओं की ड्यूटी लगाती है जो गांव के बाहर आने जाने वालों से पूछताछ करती है। बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं करने देते। गांव का कोई सदस्य बाहर गया है तो उसको सैनिटाइज के बाद ही गांव में आने दिया जाता है। वहीं गांव में बने ग्राम देवता भईंयां बाबा के मंदिर के प्रति भी ग्रामीणों में पूरी श्रद्धा है।
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गांव में आने वालों की जांच करते ग्रामीण।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव के सरपंच चिरंजीलाल का कहना है कि कोरोना के चलते कड़े निर्णय लेने पड़े हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह गांव का ही क्यों न हो, उसकी पहले पड़ताल की जाती है। पहले पूछा जाता है कि जो व्यक्ति गांव में प्रवेश कर रहा है, वह कहां से आ रहा है? किनसे मिलकर आ रहा है। यह सब जांच के बाद उसके हाथों को सैनिटाइज करवाया जाता है और फिर उसे गांव के अंदर प्रवेश मिलता है।
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गांव का मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीण युवा इस बात को प्रत्येक बड़े बुजुर्ग को बताते हैं कि अगर इम्यूनिटी सही होगी तो बीमारी पास नहीं फटकेगी। इसलिए खेत में काम करने के बाद सभी लोग हर रोज प्रोटीन युक्त आहार का प्रयोग करें। इसके अलावा नींबू, अदरक, गिलोय, तुलसी, तुलसी, काली मिर्च, पालक, खीरा, संतरा, लहसुन व खाने में फलों का प्रयोग करें।
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गांव में दूर दूर बैठे लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रत्येक ग्रामीण के लिए अगर वह घर से बाहर निकलता है तो मास्क बहुत जरूरी है। नहीं होने पर तुरंत उसको मास्क लगाने के लिए बोला जाता है। इसके साथ साथ जहां भी लोग बैठते हैं वहां पर सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन करना जरूरी होता है।
यह गांव में वास्तव में ही दूसरों के लिए रोल मॉडल है। ऐसा करके ही कोरोना को खत्म किया जा सकता है। दूसरे लोगों को भी इस गांव से शिक्षा लेनी चाहिए। - डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन।