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जरा हटके: अच्छी पढ़ाई कर डिग्री ली, मगर नौकरी के पीछे भागने के बजाय चुना पशुपालन, जानिए क्या है कमाई

Sun, 27 Feb 2022 02:22 AM IST
भूपेंद्र सिंह संजय वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
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अच्छी पढ़ाई कर डिग्री ली, मगर नौकरी के पीछे भागने के बजाय चुना पशुपालन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अच्छी खासी पढ़ाई कर डिग्रियां हासिल कीं। मगर कभी नौकरी के पीछे नहीं भागे। कम अनुभव होने के बावजूद भी पशुपालन में हाथ आजमाया तो कामयाबी भी मिली। जुनून और जज्बे ने कामयाबी की तरफ कदम बढ़ाए तो खूब शोहरत भी मिली। झोली में अनमोल धन आया तो उसकी नुमाइश ने सबका दिल जीत लिया। राज्य स्तरीय पशु मेले में कुछ ऐसे युवा भी नजर आए जो न केवल अच्छे पढ़े लिखे हैं, बल्कि पशुपालन में भी उनके हुनर और जुनून के सब कायल हो गए हैं। 

हरियाणा के भिवानी में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पशु मेले में प्रदेश भर से घोड़े, घोड़ी, मुर्राह झोटा, भैंस, बकरी पालक पहुंचे हैं। पशुपालक कुछ युवा तो स्नातकोत्तर तक पढ़े हैं, मगर वे कभी सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भागे। उनका मानना है कि पशुपालक अच्छा व्यवसाय है। बशर्ते उसमें जी जान से जुटना पड़ेगा और जितना भी अनुभव हासिल होगा, उसी से वह आगे बढ़ेगा। इन युवाओं ने सरकारी मदद की भी कभी दरकार नहीं की, लेकिन अपनी काबिलियत और हौसले की बदौलत न केवल अच्छे मुकाम पर पहुंचे, बल्कि अपने पशुओं की खासियत से उन्हें अच्छी शोहरत भी मिली। कई युवा पशुपालकों के पास तो ढाई करोड़ तक के बेशकीमती घोड़े थे, जिनकी न केवल नस्ल खास है, बल्कि उनकी ऊंचाई और आकर्षण भी मेले में आए लोगों को अपनी और खींच रहा था। भले ही इन पर मेहरबान हुए लोगों ने इनकी कीमत लगा दी, लेकिन पशुपालकों के लिए ये उनके अनमोल धन से कम नहीं है।
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अपने घोड़े बुर्ज खलिफा के साथ प्रद्युमन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एमए तक पढ़ा अरविंद उर्फ भोला, मारवाड़ी घोड़ों ने दिलाई पहचान
चरखी दादरी के झोझूकलां क्षेत्र का गांव असावरी निवासी अरविंद उर्फ भोला एमए तक पढ़ा लिखा है। उसने मास्टर डिग्री करने के बाद कभी नौकरी की चाह नहीं की। उसने कुछ साल पहले घोड़ों का खुद का कारोबार शुरू किया था। उसके पास फिलहाल आठ से दस घोड़े और घोड़ियां हैं। अरविंद ने बताया कि उसके पास इंडिया टॉप मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा बुर्ज खलीफा है, जिसकी कीमत अब तक ढाई करोड़ लग चुकी है। वह इंडिया टॉप ग्रेड गैंबलर का बेटा है। जो घुड़दौड़ में काफी प्रसिद्ध रह चुका है। उसके पास आठ से दस घोड़े-घोड़ियां हैं। घोड़ा ब्रीडिंग में इस्तेमाल हो रहा है। उसे हर माह करीब पांच लाख की आमदनी का जरिया मिल चुका है। सरकारी नौकरी में इतना कभी भी नहीं कमा सकता था। मारवाड़ी घोड़ों ने उसे भी खास पहचान दिला दी है।
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घोड़े जाबाज अपने मालिक पवन कुमार के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरत के साथ दिया रोजी रोटी का जरिया
हिसार के पवन कुमार ने बताया कि उसके पास मारवाड़ी नुगरा नस्ल के नौ घोड़े और आठ घोड़ियां हैं। वह एमएससी ज्योग्राफी से मास्टर डिग्री ले चुका है। लेकिन घोड़ों के कारोबार ने उसे शोहरत के साथ रोजीरोटी का जरिया भी दिया है। पिछले 10 साल से वह इस कारोबार में है। उसका पांच साल का घोड़ा जांबाज ऑल इंडिया चैंपियन रह चुका है। ब्रीडिंग और घोड़ियों के कारोबार में उसे अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। उसके घोड़ों और घोड़ियों को खास रंग और उनकी ऊंचाई की वजह से जाना जाता है। उनकी सवारी भी करना भी शान है।

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अपनी घोड़ी रानी के साथ मुनार्क भारद्वाज। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुनार्क भारद्वाज वकालत के साथ कर रहा घोड़ों का कारोबार
सोनीपत निवासी मोनार्क भारद्वाज ने बताया कि वह सोनीपत न्यायालय में वकालत करता है। उसका पिता भी सोनीपत बार का पदाधिकारी हैं, लेकिन उसका घोड़ों का कारोबार भी है। उसकी आठ साल की घोड़ी रानी लगातार चार साल से चैंपियन का खिताब अपने नाम करती आ रही है। उसने दो बार झज्जर और गन्नौर एग्रो सीमेट में भी पुरस्कार जीते। रानी अब तक करीब तीन लाख के नकद पुरस्कार जीत चुकी है। रानी की एक साल की बेटी जुल्फी भी मेले में आई है। मारवाड़ी पंचकल्याण नस्ल के घोड़े और घोड़ी कारोबार में भी अच्छा मुनाफा दे रहे हैं। घोड़ी रानी का पिता रामराज स्टेलियन घोड़ा और मां मारवाड़ी पंचकल्याण दोनों ही हरियाणा चैंपियन रह चुके हैं। उनकी बेटी जुल्फी भी उन्हीं के नक्शेकदम पर है।
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बड़ा सुलतान व छोटे सुलतान के साथ पशुपालक धर्मेंद्र। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मर्चेंट नेवी के धर्मेंद्र को सुलतान भाइयों ने दिलाई पहचान
भिवानी जिले के गांव जीतवानबास निवासी धर्मेंद्र सिंह मर्चेंट नेवी में है। उसका छोटा भाई बारहवीं पास है। वे दोनों बकरी पालन भी करते हैं। उनके पास सुलतान भाइयों बकरों का बेहतरीन जोड़ा है। सुलतान और छोटा सुलतान आम बकरों से खास हैं। उनकी ऊंचाई और आकर्षण भी मेले में लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। धर्मेंद्र के भाई छोटू ने बताया कि सिरोही नस्ल के बकरे उनके पास हैं। जिनमें एक की कीमत करीब दस लाख है। उनकी मां गौरी है। इन दोनों भाइयों की ऊंचाई 48 इंच है। दो साल से पशुपालन कर रहे हैं, अच्छा मुनाफा हो रहा है। पशु बीमा व अन्य सरकारी योजनाओं में भी उन्हें लाभ मिल रहा है।
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सुलतान के साथ ढाणीमाहू का श्याम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्याम हर माह कमा रहा पांच लाख, मुंबई तक जाता है माल
ढाणीमाहू का पशुपालक श्याम बारहवीं तक पढ़ा लिखा है। वह हर माह पांच लाख कमा रहा है। उसके पास गुजरी नस्ल के बकरे व बकरियां हैं। इनमें सुलतान बकरा भी खास है। पिछले चार साल में वह 35 लाख से अधिक कमा चुका है। उसके पास 60 बकरियां हैं। उसके सुलतान बकरे की ब्रीडिंग से पैदा हुए बच्चे मुंबई तक जाते हैं। जो बकरे नस्ल सुधार में इस्तेमाल नहीं होते, उनका प्रयोग मास के लिए होता है।
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