अच्छी खासी पढ़ाई कर डिग्रियां हासिल कीं। मगर कभी नौकरी के पीछे नहीं भागे। कम अनुभव होने के बावजूद भी पशुपालन में हाथ आजमाया तो कामयाबी भी मिली। जुनून और जज्बे ने कामयाबी की तरफ कदम बढ़ाए तो खूब शोहरत भी मिली। झोली में अनमोल धन आया तो उसकी नुमाइश ने सबका दिल जीत लिया। राज्य स्तरीय पशु मेले में कुछ ऐसे युवा भी नजर आए जो न केवल अच्छे पढ़े लिखे हैं, बल्कि पशुपालन में भी उनके हुनर और जुनून के सब कायल हो गए हैं।
हरियाणा के भिवानी में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पशु मेले में प्रदेश भर से घोड़े, घोड़ी, मुर्राह झोटा, भैंस, बकरी पालक पहुंचे हैं। पशुपालक कुछ युवा तो स्नातकोत्तर तक पढ़े हैं, मगर वे कभी सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भागे। उनका मानना है कि पशुपालक अच्छा व्यवसाय है। बशर्ते उसमें जी जान से जुटना पड़ेगा और जितना भी अनुभव हासिल होगा, उसी से वह आगे बढ़ेगा। इन युवाओं ने सरकारी मदद की भी कभी दरकार नहीं की, लेकिन अपनी काबिलियत और हौसले की बदौलत न केवल अच्छे मुकाम पर पहुंचे, बल्कि अपने पशुओं की खासियत से उन्हें अच्छी शोहरत भी मिली। कई युवा पशुपालकों के पास तो ढाई करोड़ तक के बेशकीमती घोड़े थे, जिनकी न केवल नस्ल खास है, बल्कि उनकी ऊंचाई और आकर्षण भी मेले में आए लोगों को अपनी और खींच रहा था। भले ही इन पर मेहरबान हुए लोगों ने इनकी कीमत लगा दी, लेकिन पशुपालकों के लिए ये उनके अनमोल धन से कम नहीं है।