प्रतीकात्मक तस्वीर
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वैक्सीन की पहली डोज लगाने के 21 दिन बाद वांलटियरों को दूसरी डोज लगाई जाएगी। इस बीच छह माह तक एम्स प्रशासन वालंटियर के स्वास्थ्य पर नजर रखेगा। आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिक डॉ अशोक पांडेय ने बताया कि जो भी वालंटियर ट्रायल में शामिल होंगे, वह कभी कोरोना संक्रमित न हुआ हो। इसके अलावा उसे कोविशील्ड, कोवैक्सीन या फिर स्पूतनिक कोई वैक्सीन न लगी हो। बताया कि ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम हैं। लेकिन इसके बाद भी प्रयास है कि वालंटियर जल्द से जल्द मिल जाए, जिससे की ट्रायल का काम जल्द से जल्द पूरा हो सके।