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यहां के हर घर में तीन प्रवेश द्वार हैं। यह परंपरा आज से नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। इस का पालन कस्बे में रहने वाले 'हिदू धर्म के साथ मुस्लिम धर्म' के लोग भी करते हैं। मान्यता है कि जो इस परंपरा का निर्वहन नहीं करता है उसके यहां अनिष्ट हो जाता है। यह कस्बा तहसील मुख्यालय से 3 किलोमीटर पूरब व उत्तर दिशा में स्थित नगर पंचायत मझौलीराज के नाम से जाना जाता है। ऐसे तो इस कस्बे को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन यहां हर घर में लगे तीन दरवाजे पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। इस मान्यता का आधार है 'विशेन वाटिका' नामक पुस्तक।