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भगवान श्रीराम के घर और ससुराल के बीच में बसा है ये गांव, यहां आज भी लोग निभा रहे हैं ये परंपरा

Wed, 17 Jun 2020 09:14 AM IST
vivek shukla रत्नेश कुमार यादव, सलेमपुर (देवरिया)।
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Deoria news - फोटो : अमर उजाला।
आज भले ही नई तकनीक का दौर है, देश में बदलाव हो रहा है। घरों के निर्माण में नित नई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। मानचित्रों के आधार पर आधुनिक आवास बनाए जा रहे हैं, लेकिन देवरिया जिले के तहसील क्षेत्र का एक कस्बा में मकान निर्माण को लेकर सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है।
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Deoria news - फोटो : अमर उजाला।
यहां के हर घर में तीन प्रवेश द्वार हैं। यह परंपरा आज से नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। इस का पालन कस्बे में रहने वाले 'हिदू धर्म के साथ मुस्लिम धर्म' के लोग भी करते हैं। मान्यता है कि जो इस परंपरा का निर्वहन नहीं करता है उसके यहां अनिष्ट हो जाता है। यह कस्बा तहसील मुख्यालय से 3 किलोमीटर पूरब व उत्तर दिशा में स्थित नगर पंचायत मझौलीराज के नाम से जाना जाता है। ऐसे तो इस कस्बे को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन यहां हर घर में लगे तीन दरवाजे पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। इस मान्यता का आधार है 'विशेन वाटिका' नामक पुस्तक।
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Deoria news - फोटो : अमर उजाला।
यह पुस्तक यहां के राज परिवार के पास संरक्षित है। पुस्तक के मुताबिक यहां के राजा बलभद्र नारायण मल्ल के पूर्वजों ने वर्ष 1416 में अपना महल बनवाया, जिस पर सूर्य की किरणें विपरीत दिशा से पड़ने लगी, जिसे सूर्यभेद कहा जाता है। इसके बाद राज्य में अशुभ होने लगा। राजा ने एक ज्योतिषाचार्य को बुलाया और सलाह ली तो ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अगर हर घर में तीन दरवाजे होंगे तो सूर्यभेद समाप्त हो जाएगा।

 

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Deoria news - फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद राजा के आदेश पर हर घर में तीन दरवाजे लग गए और अशुभ कार्य रुकने के साथ ही उन्नति होने लगी। उस समय शुरू हुई यह परंपरा आज भी है। जब कोई घर बनवाता है तो तीन दरवाजे जरूर लगवाता है। तब से हिदू ही नहीं मुस्लिम समुदाय के लोग भी इस परंपरा को बखूबी निभाते हैं। कस्बे के लोग बताते हैं कि तीन दरवाजे हमारे पूर्वजों के जमाने से लगते आ रहे हैं। बीच-बीच में कुछ लोगों ने इसमें बदलाव करने का प्रयास किया तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसलिए अब कोई भी इसमें बदलाव करने से परहेज करता है।
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Deoria news - फोटो : अमर उजाला।
भगवान श्रीराम के घर और ससुराल के बीच में है मझौलीराज
इतिहासकार डॉ. दान पाल सिंह के अनुसार विशेन वाटिका में उल्लेख है कि अयोध्या के राजा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के समय में इस स्थान का नाम इतिहास में मध्यवलिया मिलता है। इसे मध्यवलिया इसलिए कहा जाता था कि जनकपुर (पटना, बिहार) स्थित माता जानकी के मायके से उनकी ससुराल अयोध्या के बीच के मध्य में है। विशेन वाटिका पुस्तक के मुताबिक भगवान श्रीराम की बरात ने यहां कुछ पल विश्राम भी किया था।
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