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शिक्षक दिवस विशेष: बुलंद हौसलों से बदली विद्यालयों की सूरत, अपने दम पर पढ़ाई का बनाया माहौल

Mon, 05 Sep 2022 01:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

कई विद्यालय ऐसे हैं, जो निजी विद्यालयों को चुनौती दे रहे हैं। इसके लिए शिक्षकों को राज्य अध्यापक और राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। इस बार भी शिक्षक दिवस यानी सोमवार को गगहा के शिक्षक प्रवीण मिश्रा को पुरस्कार मिल रहा है।
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गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।
बुलंद हौसलों और लगन की बदौलत शिक्षकों ने प्राथमिक विद्यालयों की सूरत बदल दी। पढ़ाई का माहौल बनाया। इसी का नतीजा रहा कि दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ गई। कई विद्यालय ऐसे हैं, जो निजी विद्यालयों को चुनौती दे रहे हैं। इसके लिए शिक्षकों को राज्य अध्यापक और राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। इस बार भी शिक्षक दिवस यानी सोमवार को गगहा के शिक्षक प्रवीण मिश्रा को पुरस्कार मिल रहा है।

 
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अल्पा निगम। - फोटो : अमर उजाला।
आर्ट एंड क्राफ्ट, आईसीटी, लैंग्वेज लैब से बनाया अध्ययन का माहौल
प्राथमिक विद्यालय तिलौली सरदारनगर पर तैनात अल्पा निगम को वर्ष 2017 में राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया गया। जुलाई 2010 में जब उन्हें विद्यालय पर तैनाती मिली तो बच्चों के नामांकन की संख्या 200 से अधिक थी। मगर, कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी। अल्पा ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। सबसे पहले अभिभावकों को अभियान चलाकर प्रौढ़ शिक्षा के माध्यम से जागरूक किया। समर कैंप, आईसीटी उपकरण के माध्यम से प्रोजेक्टर, लैपटॉप, डिजिटल लैंग्वेज लैब, आर्ट एंड क्राफ्ट, पपेट्री के साथ साथ चौपाल लगाकर पढ़ाई का ऐसा माहौल बनाया। आज विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 265 है। प्रतिदिन बच्चों की उपस्थिति 80-90 फीसदी के बीच रहती है।  

 
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मंजूषा सिंह - फोटो : अमर उजाला।
निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा विद्यालय
पिपरौली ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय बरहुआ में तैनात मंजूषा सिंह को वर्ष-2018 में राज्य अध्यापक पुरस्कार मिला। वर्ष 2010 में मंजूषा सिंह को जब विद्यालय पर तैनाती मिली तो विद्यालय में महज 120 बच्चों का नामांकन था। विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। आसपास के गांव वाले बच्चों को स्कूल भेजना ही नहीं चाहते थे। बस फिर क्या था, मंजूषा ने विद्यालय की सूरत को बदलने के लिए पहले अभिभावकों से संपर्क साधा। उन्हें स्कूल बुलाकर बच्चों को स्कूल भेजने और शिक्षा की अलख जगाई। पढ़ाई के साथ साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन पर फोकस किया। डेस्क बेंच की व्यवस्था कराने के साथ ही विद्यालय का जीर्णोद्धार कराया। आज ये विद्यालय निजी स्कूलों को भी टक्कर दे रहा है।

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श्वेता सिंह - फोटो : अमर उजाला।
सामुदायिक स्वच्छता पर चलाया महाअभियान
कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिक्टौर पर तैनात श्वेता सिंह को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष-2019 में राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष-2010 से ही शिक्षिका की ओर से विद्यालय की सूरत को बदलने का प्रयास प्रारंभ किया गया। बिना शासकीय सहायता के विद्यालय में पठन कक्ष बनाकर विद्या दान अभियान चलाया। इसके अतंर्गत कहानी, सामान्य ज्ञान से जुड़ी 247 किताबें विद्यालय को मिलीं। सामुदायिक स्वच्छता अभियान के अंतर्गत गांव के अंदर जिन घरों में शौचालय थे, उन्हें जाकर बच्चों ने शौचालय स्टार दिया। बच्चों की मदद से खुद ही विद्यालय की दीवारों पर टीएलएम पेंट किया। नवाचारों का प्रयोग के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों की प्रतिभागिता कराई।
 
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प्रवीण मिश्रा - फोटो : अमर उजाला।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चमक बिखेर रहे विद्यार्थी
गगहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बेलकुर में तैनात प्रवीण मिश्रा को वर्ष 2021 के राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए जिले से चुना गया है। भारत सरकार की ओर से आयोजित इंस्पायर अवार्ड, आईआईटी गांधीनगर की ओर से आयोजित फिल्म मेकिंग, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा, गोरखपुर महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं, मंडल और जनपद स्तरीय विज्ञान आधारित प्रतियोगिता, जनपद स्तरीय खेल कूद प्रतियोगिताओं में विद्यालय के विद्यार्थियों ने चमक बिखेरी है। प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह के सहयोग से प्रवीण लगातार विद्यालय में अध्ययन और अध्यापन के माहौल को बेहतर बना रहे हैं। इसी का परिणाम है कि बच्चे लगातार अपनी मेधा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

 
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चंपा सिंह - फोटो : अमर उजाला।
नवाचारों से हुआ कायाकल्प
जंगल कौड़िया ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 6 अक्तूबर 2007 से तैनात चंपा सिंह ने विद्यालय में शिक्षण के स्तर को बेहतर बनाने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई।
उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए वर्ष 2017 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने अरविंदो सोसाइटी के साथ मिलकर 11 नवाचारों को लागू किया। सुपर मॉम, रोटरी क्लब के साथ मिलकर विद्यालय का हैप्पी स्कूल के रूप में विकास किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा के सफल आयोजन के लिए 14 किताबों को तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई। अभी उनके विद्यालय 325 से अधिक बच्चे नामांकित हैं।
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