आमी नदी के किनारे बना मस्जिद और मंदिर।
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उन्होंने आगे कहा कि सद्गुरु कबीर ने भी पानी को जीवन का आधार मानते हुए कहा है कि 'रुखी सूखी खाय के ठंडा पानी पीयू' व 'सर्वर सर्वर संत जना चौथा बरसे मेह, परमारथ के कारने चारो धरि देह'। गुरु भक्ति को आमी जल से जोड़ते हुई कहा है कि 'गुरु दरियाव में नहाना हो, जासो दुर्मति भागे, जब लग गुरु दरियाव न पावे तब तक फिरत भुलाना हो'।