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शहीद नवीन की हुई अंतिम विदाई: पिता ने बहादुर बेटे को नम आंखों से दी मुखाग्नि, बोले- 'मुझे मेरे लाल पर गर्व है'

Thu, 27 May 2021 09:43 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए सैकड़ों लोग। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले के सहजनवां तहसील क्षेत्र के भगवानपुर निवासी जय प्रकाश सिंह के छोटे बेटे व जम्मू कश्मीर में शहीद नवीन कुमार सिंह (23) को गुरुवार को अंतिम विदाई दी गई। सेवा के जवान गोरखपुर के लाल का पार्थिव शरीर लेकर आए, फिर गांव से ही अंतिम यात्रा निकाली गई। नम आंखों के साथ तमाम लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और भारत माता का जयघोष होता रहा। देशभक्ति के गीत गाए गए। कालेसर स्थित मोक्षधाम पर नवनीत का राजकीय सम्मान साथ अंतिम संस्कार किया गया।

जानकारी के मुताबिक, वीर सपूत नवीन कुमार सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा क्षेत्र उमड़ पड़ा। जैसे ही पता चला कि शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव आ गया, वैसे ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। सुबह करीब आठ बजे अंतिम यात्रा की तैयारी पूरी कर नवीन का पार्थिव शरीर सेना के वाहन पर रखा गया। सेना के जवानों के साथ ही गांव व क्षेत्र के लोग अंतिम यात्रा के साथ चल पड़े। भगवानपुर से पैदल चल कर सब नौसड़ पहुंचे, फिर कालेसर स्थित मोक्ष धाम गए। भगवानपुर से मोक्षधाम की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। जहां से वीर सपूत की अंतिम यात्रा निकली, वहां से हुजूम साथ हो गया।

 
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शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों ने देश भक्ति गीतों पर तिरंगा लहराया। - फोटो : अमर उजाला।
पार्थिव शरीर जब मोक्ष धाम पहुंचा तो पूरे राजकीय सम्मान के साथ पिता ने देश के वीर सपूत को मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने अपने जाबांज सिपाही को पुष्प अर्पित कर श्रंद्धाजलि दी। मोक्षधाम पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। भारत माता के जयकारे लगाए गए। इस मौके पर पूर्व विधायक यशपाल रावत राम प्रकाश शुक्ला दिलीप यादव प्रभाकर दुबे, सरवन पांडे छोटेलाल मौर्य गिरीश यादव व विभ्राट चंद कौशिक मौजूद रहे।

 
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शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए सांसद रवि किशन। - फोटो : अमर उजाला।
फरवरी में घर आए थे नवीन
शहीद नवीन फरवरी में घर आए थे। साथ ही अपने सहपाठियों के साथ बैठकर ड्यूटी के दौरान सेना के प्रशिक्षण के बारे में खूब बातें की थीं। कहा था कि देश के लिए कुछ कर गुजरना रहता है। बस यही एक उद्देश्य रहता है। कम उम्र में ही सेना में शामिल होने और कमांडो जैसे पद पर तैनात होने पर जहां नवीन को खुशी थी, वहीं परिवार के लोगों को गर्व था। नवीन के पिता भी सेना से रिटायर हैं।
 
 

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शहीद के पार्थिव शरीर के साथ पिता। - फोटो : अमर उजाला।
गर्व है मुझे, मेरा लाल देश के लिए लड़कर शहीद हुआ
सेना से रिटायर जयप्रकाश सिंह के चार बच्चे हैं। इसमें दो बेटे व दो बेटियां शामिल हैं। सबसे छोटे नवीन ही थे। ग्रामीण कहते हैं कि नवीन खुश मिजाज थे। वह जब गांव में निकलते थे तो बड़े, बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते थे। बातचीत में कहते थे कि जरूरत पड़ी तो देश के लिए यह जीवन भी समर्पित कर दूंगा शायद उसे आभास था कि उसके साथ ऐसा ही कुछ होने वाला है जबकि पिता जो खुद फौजी थे वह काफी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा मुझे गर्व है। मेरा लाल इस देश के लिए लड़कर शहीद हुआ है।

 
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अंतिम यात्रा में शामिल हुए सैकड़ों लोग। - फोटो : अमर उजाला।
भाई को कार दिलाने व जून में छुट्टी पर आने का दिलाया था भरोसा
जम्मू कश्मीर में शहीद नवीन सिंह ने बड़े भाई विकास को नई कार दिलाने का भरोसा दिलाया था। कहा था कि इस बार आएंगे तो चलकर कार लेंगे। विकास की नवीन से अंतिम बार 24 मई को सुबह 10 बजकर 5 मिनट पर मोबाइल फोन पर बात हुई थी। 20 मिनट की बात में नवीन ने सात जून को छुट्टी पर घर आने का भरोसा दिलाया था। अब वह कभी नहीं आ सकेगा। यह कहकर विकास शहीद के पार्थिक शरीर से लिपटकर रोने लगे। यह देख सबका कलेजा फट गया और आंखें नम हो गईं।

 
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शहीद के पिता से मिलते सांसद रवि किशन। - फोटो : अमर उजाला।
भरा पूरा परिवार छोड़ा गए शहीद नवीन
शहीद के परिवार में माता-पिता के अलावा एक भाई व दो बहनें भी हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। बड़े भाई व नवीन की शादी होनी थी। अब नवीन दुनिया छोड़कर चले गए।

सांसद रवि किशन ने बंधाया ढांढस
शहर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद रवि किशन भी शहीद नवीन कुमार सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल हुए हैं। वह कई किलोमीटर तक पैदल चले, फिर कालेसर स्थित मोक्षधाम जाकर शहीद को अंतिम सलामी दी। सांसद ने शहीद के पिता से मिलकर उन्हें ढांढस भी बंधाया और कहा कि केंद्र व राज्य सरकार हर संभव मदद के लिए तैयार है। सांसद ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के साथ ही एक सड़क का नाम शहीद के नाम पर करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व  यूपी के मुख्यमंत्री शहीदों का सम्मान करते हैं। दुख की घड़ी में परिवार को हर संभव मदद देने को तैयार रहते हैं।
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