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गोरखपुर का खिचड़ी मेला: बच्चों को लुभाएंगे चरखी और घोड़ा वाले झूले, रोज उमड़ रही भीड़

Thu, 11 Jan 2024 02:22 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले खिचड़ी मेला में सबसे अधिक मांग खजला की रहती है। बुलंदशहर का ये खास व्यंजन खिचड़ी मेले में ही बिकता है। खिचड़ी मेले में करीब 50 वर्षों से खजला की दुकान लगाने वाले दिल्ली के राकेश ने बताया कि उनकी तीसरी पीढ़ी मेले में खजला की दुकान लगाने आ रही है।
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गोरखनाथ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
चरखी और घोड़ा वाले झूले, बांसुरी और गुब्बारे, मौत का कुआं और मन ललचा देने वाला खजला। यहीं नहीं, ज्वेलरी व सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें भी, जहां महिलाओं की काफी भीड़ नजर आती है।

यह दृश्य गोरखनाथ मंदिर में लगे खिचड़ी मेले का है। आज के युवा यहां इतिहास का हिस्सा बनते जा रहे पुराने दौर के मनोरंजन के साधनों को देख सकते हैं। मेला परिसर में 50 से अधिक दुकानों की झांकियां सज गई हैं और अभी से लोगों की अच्छी खासी तादाद भी पहुंचने लगी है, बच्चे आनंद उठाने लगे हैं।

मेला प्रबंधक शिवशंकर उपाध्याय ने बताया कि मेले की औपचारिक शुरुआत 15 जनवरी को होगी। मेले में टिकटिक घोड़ा, म्यूजिकल डांस झूला, डबल डेकर झूले, ब्रेकडांस, ड्रेगन, रेंजर, ज्वाइंट व्हील, स्लंबो, टोराटोरा, बड़ी नाव के जैसे झूलों के साथ ही मौत के कुआं का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।

महिलाएं मेले में घरेलू सामान और श्रृंगार के सामानों की खरीदारी कर रही हैं। वहीं लोग लजीज व्यंजनों का भी जमकर जायका ले रहे हैं। इस बार हरियाणा के डबल डेकर झूले, लखनऊ का टिकटिक घोड़ा झूला बच्चों को भरपूर मनोरंजन करने के लिए तैयार है। बुलंदशहर खजला के साथ ही लखनऊ की चाट लोगों का जायका बढ़ाएगी।

 
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गोरखनाथ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
खजला की है विशेष पहचान
गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले खिचड़ी मेला में सबसे अधिक मांग खजला की रहती है। बुलंदशहर का ये खास व्यंजन खिचड़ी मेले में ही बिकता है। खिचड़ी मेले में करीब 50 वर्षों से खजला की दुकान लगाने वाले दिल्ली के राकेश ने बताया कि उनकी तीसरी पीढ़ी मेले में खजला की दुकान लगाने आ रही है। बताया कि जब शुरुआत के दिनों में खजला पांच से छह रुपये किलो बिकता था, अब वही खजला 400 रुपये किलो बिक रहा है। बताया कि खजला तीन तरह के होते हैं, इसमें मीठा, नमकीन और खोया वाले खजला लोगों को खूब पसंद आती है।

35 वर्षों से खिचड़ी मेले में लगता है फोटो स्टूडियो
खिचड़ी मेले को यादगार बनाने के लिए ज्यादातर लोग अपने मोबाइल में तस्वीरों को कैद करते हैं, लेकिन एक समय था कि मेले में लगने वाले फोटो स्टूडियो पर फोटो खिंचवाने के लिए लोगों की लंबी कतार लगती थी। मेले में स्टूडियो लेकर पहुंचे कानपुर के नसीम ने बताया कि मेले में 35 वर्षों से हम लोग स्टूडियो लेकर आ रहे हैं, लेकिन अब पहले की तुलना में 20 फीसदी लोग ही स्टूडियो में फोटो खिंचवाने आते हैं। इससे खर्चा भी मुश्किल से निकल पाता है।

 
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गोरखनाथ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
महिलाएं को खूब भाता है खिचड़ी मेला
गोरखनाथ मंदिर में सबसे अधिक भीड़ महिलाओं की होती है, इसका कारण मेले में लगने वाले घरेलू और श्रृंगार के सामान की दुकानें हैं। मेले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही दिल्ली के उत्पाद सस्ते दामों पर मिल जाते हैं। श्रृंगार का दुकान लगाने वाले लखीमपुर खीरी के मोहसिन ने बताया कि खिचड़ी मेले में वह 10 वर्षों से दुकान लगा रहे हैं। ज्यादातर सामान वह दिल्ली से मंगाते हैं। बताया खिचड़ी मेले में वह डेढ़ महीने के लिए आते हैं। श्रृंगार के सामानों में महिलाएं का अच्छा रूझान रहता है।

 

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गोरखनाथ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
हरियाणा, दिल्ली, बिहार के झूले बढ़ाएंगे रोमांच
मेले में हरियाणा, बिहार, दिल्ली, बस्ती, कन्नौज, लखनऊ आदि राज्यों और शहरों से झूले आए हैं। 10 वर्षां से लखनऊ से झूला लेकर गोरखनाथ मंदिर आ रहे सुनील ने बताया कि मेले में झूले को लेकर खासा उत्साह रहता है। बड़ी संख्या में युवा और बच्चे झूला झूलने के लिए ही मेले में आते हैं।

 
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गोरखनाथ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
सौ साल से लगता है मेला...आजादी के बाद बढ़ा दायरा
गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताते हैं, गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले खिचड़ी मेले की परंपरा तो कई सौ वर्षों पुरानी है। सौ साल पहले तक यहां स्थानीय लोग ही अपनी दुकानें लगाते थे। जब देश आजाद हुआ तब खिचड़ी मेले को भव्य रूप मिला। महंत दिग्विजयनाथ के समय में खिचड़ी मेले में दूसरे राज्यों की झूले और खानपान की दुकानें लगाने वाले लोग आने लगे। 1980 के बाद महंत अवेद्यनाथ के समय में इसका दायरा काफी बढ़ गया। देश के कोने-कोने से लोग दुकानें लगाने आने लगे। समय के साथ ही दुकानें बढ़ती गई तो मेला परिसर का दायरा भी बढ़ा दिया गया।
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