चरखी और घोड़ा वाले झूले, बांसुरी और गुब्बारे, मौत का कुआं और मन ललचा देने वाला खजला। यहीं नहीं, ज्वेलरी व सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें भी, जहां महिलाओं की काफी भीड़ नजर आती है।
यह दृश्य गोरखनाथ मंदिर में लगे खिचड़ी मेले का है। आज के युवा यहां इतिहास का हिस्सा बनते जा रहे पुराने दौर के मनोरंजन के साधनों को देख सकते हैं। मेला परिसर में 50 से अधिक दुकानों की झांकियां सज गई हैं और अभी से लोगों की अच्छी खासी तादाद भी पहुंचने लगी है, बच्चे आनंद उठाने लगे हैं।
मेला प्रबंधक शिवशंकर उपाध्याय ने बताया कि मेले की औपचारिक शुरुआत 15 जनवरी को होगी। मेले में टिकटिक घोड़ा, म्यूजिकल डांस झूला, डबल डेकर झूले, ब्रेकडांस, ड्रेगन, रेंजर, ज्वाइंट व्हील, स्लंबो, टोराटोरा, बड़ी नाव के जैसे झूलों के साथ ही मौत के कुआं का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
महिलाएं मेले में घरेलू सामान और श्रृंगार के सामानों की खरीदारी कर रही हैं। वहीं लोग लजीज व्यंजनों का भी जमकर जायका ले रहे हैं। इस बार हरियाणा के डबल डेकर झूले, लखनऊ का टिकटिक घोड़ा झूला बच्चों को भरपूर मनोरंजन करने के लिए तैयार है। बुलंदशहर खजला के साथ ही लखनऊ की चाट लोगों का जायका बढ़ाएगी।