उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बड़हलगंज ब्लॉक के जगदीशपुर गांव के वजूद को राप्ती नदी ने बुधवार को मिटा दिया। नदी की कटान से अब तक बचे 12 मकान भी नदी में समा गए। नदी पिछले तीन साल से इस गांव के सामने कटान कर रही थी। अब यही कहा जाएगा कि इस इलाके में एक जगदीशपुर गांव होता था। राप्ती नदी के बढ़े जलस्तर ने तो डराया ही था, घटता पानी अब तबाही मचाने लगा है। तेजी से कटान करती नदी ने जगदीशपुर गांव के वजूद को ही खत्म कर दिया। मंगलवार रात व बुधवार दिन में गांव के रमेश पांडेय, बंधु यादव, राममौज पांडेय, संजय पांडेय, ध्रुव चन्द विश्वकर्मा, संगम गौड़, मुन्ना विश्वकर्मा समेत 12 लोगों के मकान नदी में समा गए। अब यह गांव इतिहास बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2017 से पहले गांव में 150 मकान थे। कटान शुरू हुई तो अफसरों ने बचाव कार्य का दावा किया, लेकिन हर साल गांव का कुछ न कुछ हिस्सा नदी में समाता चला गया।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
मंगलवार को कटान तेज हुई तो बाकी बचे परिवारों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था। बुधवार दोपहर तक बचे 12 मकान भी नदी में जल समाधि ले लिए। यहां रहने वाले परिवारों ने इधर-उधर शरण ली है। प्रशासन ने अभी इस गांव के लोगों को बसाने के लिए जगह भी उपलब्ध नहीं कराई है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
नदियों का जलस्तर घट रहा लेकिन खतरा नहीं
जिले की सभी नदियों का जलस्तर नीचे आ रहा है, लेकिन खतरा टला नहीं है। राप्ती नदी खतरे के निशान से 1.72 मीटर पर बह रही है। रोहिन नदी बुधवार शाम तक खतरे के निशान से 71 सेंटीमीटर नीचे आ गई। घाघरा नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर नीचे आकर स्थिर हो गई है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : गोरखपुर में बाढ़।
राप्ती से निकली गोर्रा नदी खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर बह रही है। नदियों का पानी घटने से लोग राहत की सांस ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फिर बारिश हो गई तो जलस्तर बढ़ भी सकता है।
ये टीमें लगी बचाव कार्य में
डीएम ने बताया कि बाढ़ राहत बचाव कार्यों में 11वीं वाहिनी, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), आरआरसी गोरखपुर की तीन यूनिट, एसडीआरएफ, गोरखपुर (26वीं वाहिनी पीएसी में तैनात) - दो यूनिट के साथ ही 180 पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है। इसके अलावा लेखपालों, कानूनगो के साथ ही बचाव कार्यों की निगरानी आदि के लिए सभी एसडीएम, तहसीलदार को भी लगाया गया है।