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एक्सक्लूसिव: यूपी के इस जिले में बिकते हैं 'मरीज', खरीदार लगाते हैं बोली

Wed, 17 Mar 2021 01:06 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
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Gorakhpur hospital - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर में इलाज के लिए बिहार या यूपी के दूसरे शहरों से आने वाले मरीजों को बरगला कर कुछ निजी एंबुलेंस चालक और बिचौलिए अच्छे दामों पर कुछ निजी अस्पतालों को ‘बेच’ रहे हैं। इन अस्पतालों में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की जाती है। इसी लूट से अस्पताल प्रबंधन बिचौलियों और एंबुलेंस चालकों को मोटा कमीशन दे रहे हैं। एक गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस चालक को 45-50 हजार रुपये तक का मोटा कमीशन मिलने की बात सामने आई है। सामान्य मरीजों को भर्ती कराने पर 25-30 हजार रुपये तक मिल जाते हैं।

 
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बीआरडी के बाहर खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस। - फोटो : अमर उजाला।
कमीशनबाजी के इस धंधे से आईएमए के पदाधिकारी भी चिंतित हैं। अब आईएमए ही कमीशनबाजी के आरोपों से चिकित्सा के पेशे को बचाना चाहता है। इस गठजोड़ की अमर उजाला ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि कुछ निजी अस्पताल बिचौलिए व एंबुलेंस चालकों के सहारे ही चल रहे हैं। ये मरीज व उनके परिजनों को फंसाकर लाते हैं, फिर मोटा कमीशन लेते हैं।
 
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BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
पड़ताल के मुताबिक जिले में एंबुलेंस चालकों और कुछ निजी अस्पताल संचालकों व डॉक्टरों के बीच गठजोड़ बेहद मजबूत है। इनके नेटवर्क को न तो स्वास्थ्य विभाग तोड़ पा रहा और न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की इकाई। इनको चिकित्सा के पवित्र पेशे में गंदगी की जानकारी है, फिर भी वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हाल के दिनों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सामने से एक मरीज को बरगला कर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसकी सूचना पर एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह व ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह की टीम ने कार्रवाई की थी। निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था।

 

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गोरखपुर जिला अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
सरकारी अस्पतालों के पास मजबूत नेटवर्क
निजी अस्पतालों व दलालों का नेटवर्क सबसे ज्यादा जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास फैला है। जैसे ही मरीज गेट पर पहुंचता है, वैसे ही निजी एंबुलेंस चालक सक्रिय हो जाते हैं और मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के प्रयास में जुट जाते हैं। परेशान मरीज या उसके परिजनों को बरगला कर निजी अस्पताल ले जाते हैं, फिर शुरू होता है पैसा जमा कराने का सिलसिला।

यहां से आने वाले मरीजों को बनाते हैं निशाना
इस नेटवर्क से जुड़े बिचौलिए देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बिहार, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और नेपाल से आने वाले मरीजों को निशाना बनाते हैं।

 
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Gorakhpur hospital - फोटो : अमर उजाला।
गोरखनाथ क्षेत्र में बिचौलियों की सक्रियता
सिद्धार्थनगर, महराजगंज और नेपाल से आने वाले मरीजों को गोरखनाथ क्षेत्र के आसपास के इलाकों के निजी अस्पतालों में ले जाया जाता है। इस क्षेत्र में निजी एंबुलेंस चालकों के साथ ही कुछ ऑटो व टेंपो चालकों का मजबूत नेटवर्क बना हुआ है। ऑटो, टैंपो में मरीज व उनके परिजन जैसे ही बैठते हैं, वैसे ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों का गुणगान शुरू हो जाता है। यह गुणगान निजी अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के बाद ही समाप्त होता है। यही नहीं बिचौलिए निजी अस्पतालों के निदेशक बनकर बात करते हैं। कहते हैं कि जाकर डॉक्टर साहब से मिल लीजिए। बता दीजिए डायरेक्टर साहब ने भेजा है।

 
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मरीजों की देखभाल करते डॉक्टर। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फुटहवा इनार के पास रहता है जमावड़ा
देवरिया की तरफ से आने वाले मरीजों के लिए बिचौलिए फुटहवा इनार के आसपास जमावड़ा लगाते हैं। इनकी एंबुलेंस चालकों से दोस्ती होती है। जैसे ही एंबुलेंस दिखती है, वैसे ही हाथ देकर बिचौलिए आगे की सीट पर सवार हो जाते हैं। एंबुलेंस में बैठने के बाद सरकारी अस्पतालों व डॉक्टरों की लापरवाही बताई जाती है। परेशान मरीज या उनके परिजनों को विश्वास दिलाया जाता है कि कुछ निजी अस्पतालों में बढ़िया चिकित्सक हैं। इस झांसे में मरीज के परिजन आ भी जाते हैं। यह ‘खेल’ तब खुला, जब एक मरीज को आईएमए के पदाधिकारी को दिखाने के लिए भेजा गया था। इस मरीज को फुटहवा इनार से ही हाईजैक करके तारामंडल क्षेत्र के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। मरीज से कहा गया था कि आईएमए के जिस पदाधिकारी के यहां आप जा रहे हो, वहां कई मरीजों की मौत हो चुकी है। दो दिन में ही मरीज के परिजनों की जेब खाली हो जाती है। फिर उन्हें आईएमए के पदाधिकारी की याद आती है। मरीज डिस्चार्ज कराके पदाधिकारी के पास पहुंचते हैं और आपबीती सुनाते हैं।

 
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Gorakhpur hospital - फोटो : अमर उजाला
अलग-अलग सड़कों पर रहती है निगरानी
कुशीनगर और बिहार की तरफ से आने वाले मरीजों को जगदीशपुर रोड, महराजगंज की तरफ से आने वाले मरीजों को भटहट व कैंपियरगंज के पास हाईजैक किया जाता है। खास बात यह है कि एंबुलेंस के नंबर के आधार पर वह कुछ ही देर में मरीज व ड्राइवर का डिटेल पता कर लेते हैं। फोन पर उनसे सारी डीलिंग होती है। जो संचालक ज्यादा रेट देता है, मरीज उसके अस्पताल में पहुंचा दिए जाते हैं।

एंबुलेंस चालक ने बरगलाकर भर्ती कराया था मरीज  
कुशीनगर निवासी मरीज को न्यू लोटस हॉस्पिटल में एंबुलेंस चालकों ने ही पहुंचाया था। पीड़ित मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज इलाज कराने पहुंचा था। मेडिकल कॉलेज के बाहर मौजूद एंबुलेंस चालक ने बरगला कर निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। इससे पूर्व भी एक अधिकारी के चालक ने भी अपने एक रिश्तेदार को हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां पर मोटी रकम वसूली गई थी।

 

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
आईएमए के रडार पर हैं 30 निजी अस्पताल
आईएमए ने 30 ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की है, जो चिकित्सा के पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा अस्पताल तारामंडल व गोरखनाथ क्षेत्र के हैं। जेल रोड, मेडिकल कॉलेज के आसपास, करीम नगर, गोलघर, कसया रोड पर भी में ऐसे अस्पताल हैं, जहां पर कमीशनबाजी से मरीज भर्ती कराए जाते हैं। तारामंडल में दो अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन कुछ एंबुलेंस चालक करते हैं। नौसड़ क्षेत्र में खुले एक अस्पताल का संचालक गोरखनाथ क्षेत्र का बिचौलिया बताया जा रहा है। ऐसे अस्पतालों की जांच में आईएमए अब स्वास्थ्य विभाग की मदद भी करेगा।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ एंबुलेंस चालक मरीजों को जबरन निजी अस्पतालों में पहुंचा रहे हैं। ऐसे एंबुलेंस चालकों की जांच की जाएगी। उस एंबुलेंस चालक की तलाश की जा रही है, जिसने कुशीनगर के मरीज को मेडिकल कॉलेज के सामने से जबरन लाकर न्यू लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। मामले में जांच करके कार्रवाई की जाएगी। आईएमए का सहयोग लिया जाएगा।

आईएमए सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि जिले में संचालित हर एंबुलेंस का पंजीकरण सीएमओ कार्यालय में होना चाहिए। सत्यापन भी जरूरी है। एंबुलेंस में जीपीएस ट्रैकर लगाया जाए, ताकि फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सके। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर खड़ी हो रही एंबुलेंस के बाजार को हर हाल में बंद कराया जाना चाहिए। वहीं से ‘खेल’ खेला जा रहा है। मरीजों को बेचने के आरोप सही हैं। एक मरीज खुद इस तरह का शिकार होकर मेरे पास इलाज के लिए पहुंचा था। इसमें एंबुलेंस चालकों के साथ ही कुछ आशा वर्कर भी शामिल हैं। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

 
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