गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज क्षेत्र में सरुआताल उफान पर है। ताल के पानी ने ओवरफ्लो कर तबाही मचाना शुरू दिया है। जहां सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है वहीं मूसाबार-छतहरी मार्ग पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हो गया है। उधर, नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कैंपियरगंज प्रतिनिधि के अनुसार लगातार बारिश के कारण महराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र में स्थित श्रीनगर ताल के माध्यम से पानी पवहनाला होते हुए सरुआताल में गिर रहा है। सरुआताल का पानी ओवरफ्लो करने से बगल के मूसाबार, ककटही, मिरिहिरिया, बहबोलिया और घरभरिया गांव की सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई। जलस्तर लगातार बढ़ने से बगल के गांवों में दहशत है। मूसाबार-छितहरी मार्ग पर पानी आने से दिक्कत बढ़ गई है। वहीं ककटही गांव के प्राथमिक विद्यालय में करीब पांच फीट जलभराव हो गया है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
कुसमौल मार्ग के करीब आमी नदी का पानी
महावीर छपरा से बांसगांव जाने वाले कुसमौल मार्ग पर आमी नदी का पानी सड़क से एक फीट नीचे बह रहा है। सड़क में कई जगहों पर रेनकट और कटान से कुसमौल, डेफरा, बड़ेरिया, चंदौली, खरोहवा, जुड़ापुर आदि गांवों लोगों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर ऐसे ही बड़ा तो सड़क के ऊपर बाढ़ का पानी चढ़ जाएगा और आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
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गोरखपुर में बाढ़।
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भक्सा, मटियारी गांव में भरा राप्ती का पानी
पाली प्रतिनिधि के अनुसार राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी क्षेत्र के सिसई, भक्सा, कुसम्हा कला व मटियारी गांव में भर गया है। कुछ लोग पशुओं के साथ बांध पर शरण लिए हैं। धान की फसल पूरी तरह से डूब गई है। तहसील प्रशासन द्वारा सोमवार को राशन किट का वितरण किया गया जिसमें आटा, दाल, आलू, तेल, चना का भूजा, मसाला, मोमबत्ती, माचिस आदि शामिल था, लेकिन ज्यादातर लोग इससे वंचित रहे। कुसम्हा कला गांव के लोगों के आवागमन के लिए नाव ही सहारा बना हुआ है। मटियारी गांव के प्रधान प्रतिनिधि रामेंद्र मिश्र ने बताया कि 150 लोगों को राशन किट दिया गया। करीब 350 लोग छूट गए हैं। तहसील प्रशासन द्वारा राहत किट देने की बात कही गई है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
सरयू और कुआनो का जलस्तर घटने से राहत
कुआनो और सरयू नदी का जलस्तर घटने से इसके किनारे बसे ग्रामीणों ने बृहस्पतिवार को राहत की सांस ली है। हालांकि पानी से घिरे गांव कुरावल खटीक टोला, पढ़उतिया, बेलाव भगड़ा, बेलाव डेहरा आदि अभी भी जलमग्न हैं। जिसके कारण उनकी दुश्वारियां बरकरार हैं। पढ़उटिया के करमुद्दीन, गुड्डू, दुर्जन, संगेस, कृष्ण मुरारी, बेलाव के बसंत चौरसिया, भगवान दास आदि का कहना है कि हम लोगों के घर पानी से चारों तरफ से घिरे हुए हैं। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड दो के सहायक अभियंता नजमुद्दीन का कहना है कि नदी स्थिर है, जलस्तर धीरे धीरे घट रहा है। क्षेत्र के बंधो पर पानी का कोई दबाव नहीं है। अवर अभियंता जितेंद कुमार व उपेंद्र सिंह तटबंधों की बराबर पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
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बाढ़ और बारिश ने बढ़ाईं मुश्किलें
पिपरौली क्षेत्र में आमी नदी की बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई गांव पानी से घिर गए हैं। फसलें जलमग्न हो गई हैं। पशुओं के सामने चारे का संकट गहरा गया है। कटका-रखौना, बेलवाडाड़ी, नंदापार, जैतपुर, सीयर, भलेंदरी, भगवानपुर, विनैका, मंझरिया, रकसानारा, कैली, कोल्हुई, तीनहरा, बनौड़ा, भखरा, गाड़र आदि गांवों की फसलें डूब गई हैं। कटका-रखौना गांव के लोगों के आवागमन के लिए नाव ही सहारा है। ग्रामीणों का कहना है कि नाव छोटी होने के कारण हमेशा भय बना रहता हैं। उधर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कैली, बेलवाडाड़ी, कटका में जलभराव बना हुआ है। वहीं, लगातार बारिश से ब्लॉक चौराहा, धरमौली अमटौरा मार्ग, बेलवाडाड़ी गाड़र आदि मार्गों पर जलभराव होने के कारण लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ राहत सामग्री ऊंट के मुंह में जीरा
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि शासन की ओर से दी जाने वाली बाढ़ राहत सामग्री ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है। बेलवाडाड़ी में 77 लोगों को राहत किट दिया गया, जिसमें मात्र दो किलो चावल, पांच किलो आटा, तेल, मसाला आदि शामिल है। यह एक परिवार के लिए दो से तीन दिन बमुश्किल से चलेगा। यही हाल रखौना का भी है। यहां के लोगों का कहना है कि इसके पहले बाढ़ राहत सामग्री सभी को मिलती थी।