कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में आपदा का अनुमान लगाने में चूक के बाद गोरखपुर जिला प्रशासन संभल गया है। प्रशासन ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार जिला प्रशासन का पीडियाट्रिक आईसीयू बनाने पर जोर है। मुख्यमंत्री ने हर मंडल में 100 बेड के पीडियाट्रिक आइसीयू बनाने का निर्देश दिया है। दरअसल विशेषज्ञों ने तीसरी लहर को लेकर अभी तक जितने भी अनुमान व्यक्त किए हैं, उनमें बच्चों व किशारों पर अधिक खतरा बताया गया है। गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने 500 बेड अस्पताल में से ऊपर के दो तल तीसरी लहर के लिए आरक्षित करने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त जिले में 23 सीएचसी में से 20 में इस तरह की व्यवस्था करने की योजना बनाई गई है। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आक्सीजन जेनरेशन प्लांट भी सीएचसी पर लगाए जा रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
तीन सीएचसी पर प्लांट लगाने की मंजूरी भी मिल गई है। इसके साथ ही हर सीएचसी पर 50-50 बेड के कोविड अस्पताल बनाने की भी योजना है। जिले में 200 बेड के शुरू होने वाले दो अस्पताल भी तीसरी लहर से निपटने में काफी कारगर होंगे।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
प्रशासन कर्मचारियों की कमी दूर करने की कोशिश में भी लगा है। मंडलायुक्त का कहना है कि इस समय न तो बेड की समस्या है और न ही दवा व आक्सीजन की।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए उससे निपटने की तैयारी भी चल रही है। मंडल स्तर पर पीडियाट्रिक आइसीयू स्थापित कर दिया जाएगा।
डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि अपनी ओर से हम व्यवस्था करने में जुटे हैं। बच्चों के लिए अस्पताल की व्यवस्था करने पर जोर है। इसके साथ ही कोविड अस्पतालों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। इस कार्य में जनप्रतिनिधियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। यदि तीसरी लहर आई भी तो उससे निपटने के लिए जिला पूरी तरह से तैयार रहेगा।