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यहां फिराक गोरखपुरी का बीता था बचपन, तस्वीरों में देखें आज खंडहर बनी निशानी

Fri, 28 Aug 2020 11:45 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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खंडहर बनीं फिराक गोरखपुरी की निशानी - फोटो : अमर उजाला।
मशहूर शायर रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी का बचपन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सहजनवां तहसील के अड़ीलापार गांव में गुजरा था। अब शासन- प्रशासन की उपेक्षा के कारण खंडहर बना मकान फिराक साहब की निशानी बयां कर रही है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें इनकी कहानी...
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फिराक गोरखपुरी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
फिराक साहब का जन्म 28 अगस्त 1896 को बनवारपार में हुआ था, लेकिन बचपन सहजनवां तहसील के अड़ीलापार गांव के इसी घर में गुजरा था। यहां उनकी नानी रहतीं थीं। जिन्हें कोई संतान नहीं थी। इनके पिता को नेवासा मिला हुआ था। इनके पिता मुंशी गोरख प्रसाद गोरखपुर के एक प्रतिष्ठित वकील थे। वह प्रतिदिन अड़ीलापार खरैला, कालेसर होकर इक्का से गोरखपुर आते-जाते थे।
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फिराक गोरखपुरी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद 29 जून 1914 को अड़ीलापार गांव से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर बेलवाडाडी गांव में जमींदार बिंदेश्वरी प्रसाद की बेटी किशोरा देवी के साथ फिराक साहब का विवाह हुआ था। बड़े ही धूमधाम से बरात तेनुअन तिनहरा एवं कैली होते हुए बेलवाडाडी गई थी।

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बेलवाडाडी गांव के इसी जगह पर जमींदार बिंदेश्वरी प्रसाद अपने परिवार के साथ रहते थे। - फोटो : अमर उजाला।
बरातियों को पानी पीने के लिए दोनों गांव के बीच में करीब तीन कुएं खोदे गए थे। जिसमें एक कुआं तिनहरा गांव में आज भी मौजूद है। अफसोस कि ऐसे शख्स जिनके शायरी की गूंज पूरी दुनिया में रही है। जिनका बचपन और विवाह जहां से हुआ था, आज खंडहर के रूप में पहचान बन कर रह गई है।
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फिराक गोरखपुरी का पुश्तैनी खपरैल का मकान।(इनसेट में फिराक गोरखपुरी की फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
देखरेख के अभाव में ढह गया फिराक गोरखपुरी के पुश्तैनी खपरैल के मकान का कुछ हिस्सा
फिराक साहब का पुश्तैनी खपरैल का मकान देखरेख के अभाव में पूरी तरह से जर्जर हाल में पहुंच चुका है। बारिश की वजह से कुछ दिन पहले फिराक साहब के मकान का कुछ हिस्सा ढह गया, लेकिन आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तक की जहमत नहीं उठाई। इस बात को लेकर बनवारपार के लोगों के साथ ही साहित्य व शायरी में रुचि रखने वालों में बेहद आक्रोश है।
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फिराक गोरखपुरी का मकान। - फोटो : अमर उजाला।
बनवारपार निवासी प्रवीण श्रीवास्तव, शंभूनाथ मिश्र, महीप श्रीवास्तव, संतोष कुमार, हरिद्वार यादव, डॉ. तालिब गोरखपुरी का कहना है कि फिराक साहब से जुड़ी स्मृतियों को संरक्षित नहीं कर पाना अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का परिचायक है। लोगों ने शासन-प्रशासन से खंडहर में तब्दील हो चुकी फिराक के पुश्तैनी मकान के जीर्णोद्धार के साथ ही पर्यटन स्थल बनवाने की मांग की है।
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