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Raju Srivastava: राजू श्रीवास्तव ने भी गोरखपुरियों को खूब हंसाया, कड़कड़ाती सर्दी में उमड़ा था हुजूम

Wed, 21 Sep 2022 04:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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राजू श्रीवास्तव ने दर्शकों को अपनी हास्य कला से हंसाया था। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन और उत्तर प्रदेश राज्य फिल्म विकास के अध्यक्ष रह चुके राजू श्रीवास्तव का बुधवार सुबह निधन हो गया। गोरखपुर महोत्सव 2020 में इन्होंने गोरखपुरवासियों को अपनी हास्य कला से हंसाया और गुदगुदाया था। इनको सुनने कड़कड़ाती सर्दी में भी दर्शकों का हुजूम पंडाल में उमड़ पड़ा था।

राजू श्रीवास्तव ने मजाक करते हुए कहा था कि मोदी जी ने मुझसे कहा कि मेरी मिमिक्री भी करो, यही लोकतंत्र है। एक व्यक्ति सौ रुपये में मोदी जी की मिमिक्री सिखाने का दावा कर रहा था, मैं भी चला गया। उसने सौ रुपये लेकर मुझे चाय बनाना सिखा दिया।

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दर्शकों का हुजूम पंडाल में उमड़ पड़ा था। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
12 जनवरी 2020 रविवार की रात दस बजे के बाद स्टेज पर राजू श्रीवास्तव आए थे तो दर्शकों ने शोर और तालियों के साथ उनका स्वागत किया था। दर्शकों का अभिवादन करने के साथ ही राजू अपने रंग में आ गए थे। स्वच्छता अभियान के लिए कानपुर के लोगों को अच्छा करार देते हुए बताया था कि सुबह-सुबह रेलवे लाइन के किनारे डिब्बा लेकर जाते हैं तो साथ में छाता भी ले जाते हैं। जब ट्रेन आती है तो आगे छाता लगा लेते हैं, गोरखपुर वालों को भी इनसे सीखना चाहिए। इस पर दर्शकों ने खूब तालियां पीटी थीं।

 
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दर्शकों का हुजूम पंडाल में उमड़ पड़ा था। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
मुंबई की लोकल ट्रेनों पर बोले थे कि मुंबई की लोकल ट्रेन में इतनी भीड़ होती है कि अगर खुजली हो तो अपना शरीर तलाशना पड़ता है, कभी-कभी तो बगल वाला बोलता है ऐ भाई अपनी-अपनी खुजाओ। ट्रेन में इतनी भीड़ की कोई दूसरा आपके कंधे पर सिर रखकर सोता है और आप किसी तीसरे के कंधे पर।

राजू ने टीवी को भी हास्य का विषय बनाया था। बोले थे कि रिमोट को भी दर्द होता है। जितने हाथों में जाता है उतनी बार चैनल बदला जाता है। बोले इतने चैनलों में फैशन टीवी अकेला फंसा हुआ है। लोग कहते हैं कि इतना गंदा आता है कि परिवार के साथ नहीं देख सकते, सबको अलग-अलग देखना पड़ता है।

 

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दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए थे। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
एक वृद्ध अकेले में फैशन टीवी चैनल तलाश रहे थे, मैंने पूछा- कौन सा चैनल ढूंढ रहे हो, तो बोले जिसमें आदिम जाति के लोग दिखाए जाते हैं। इस पर दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए। भारत की भाषाई भिन्नता को भी उन्होंने हास्य का विषय बनाया था। बताया था कि बंगाली हर बात ओ लगाते हैं जल को जोल बोलते हैं।

एक बाबू मोयाश ने मुझसे कहा कि राजू कोल शाम को भोजन पर आना। दूसरे दिन उनके घर पहुंच गया। रात ग्यारह बज गए खाना नहीं आया तो पूछा- बाबू मोशाय भोजन कहां है? तो बोले वो छत पर चल रहा है, राम जी का भोजन। तब समझ में आया कि उन्होंने भजन पर बुलाया था। बिहारी भी र को ड़ बोलते हैं, भरवां बैंगन और भरवां मिर्ची का नाम जब कोई बिहारी लेता है तो मैं कुछ और ही समझता हूं।

 
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गोरखपुर महोत्सव मंच पर राजू श्रीवास्तव। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
अंत में उन्होंने बरातों में भोजन शुरू होने का इंतजार करने वालों का नक्शा खींचा था। बोले थे कि जब तक ढक्कन नहीं खुलता लोग बहुत ही संभ्रांत तरीके से बात करते हैं। योगी जी इज डूइंग वेल, अभी तक ढक्कन नहीं खुला, मोदी जी की इंटरनेशनल पॉलिसी का कोई जवाब नहीं, यार अभी तक ढक्कन नहीं खुला। जैसे ही ढक्कन खुलता है तो सभी इस तरह टूटते हैं, जैसे दुश्मन का किला फतह करना हो। कुछ लोग तो कोरम पूरा करने के लिए सब कुछ अपनी प्लेट में ले लेते हैं कि कल कोई यह न कह दे कि हलवे के बाद तो असली खाना लगा था। पानी इतनी दूर रखा जाता है कि रिक्शा करना पड़े।
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