दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए थे। (फाइल)
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एक वृद्ध अकेले में फैशन टीवी चैनल तलाश रहे थे, मैंने पूछा- कौन सा चैनल ढूंढ रहे हो, तो बोले जिसमें आदिम जाति के लोग दिखाए जाते हैं। इस पर दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए। भारत की भाषाई भिन्नता को भी उन्होंने हास्य का विषय बनाया था। बताया था कि बंगाली हर बात ओ लगाते हैं जल को जोल बोलते हैं।
एक बाबू मोयाश ने मुझसे कहा कि राजू कोल शाम को भोजन पर आना। दूसरे दिन उनके घर पहुंच गया। रात ग्यारह बज गए खाना नहीं आया तो पूछा- बाबू मोशाय भोजन कहां है? तो बोले वो छत पर चल रहा है, राम जी का भोजन। तब समझ में आया कि उन्होंने भजन पर बुलाया था। बिहारी भी र को ड़ बोलते हैं, भरवां बैंगन और भरवां मिर्ची का नाम जब कोई बिहारी लेता है तो मैं कुछ और ही समझता हूं।