अगर सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, सांस फूलने, लगातार उल्टी-दस्त, आंखों में खुजली, गले में खराश की समस्या हो तो कोविड की जांच अवश्य करवाएं। बगैर जांच कराए सोशल मीडिया या अपुष्ट स्रोतों से दवाओं के नाम लेकर मनमाना इलाज से नुकसान हो सकता है। कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर होम आइसोलेट होकर आरआरटी के परामर्श अनुसार दवाएं लें। अगर रिपोर्ट निगेटिव है तो भी सतर्कता बरतें। यह कहना है जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल का। उन्होंने बताया कि कुछ मरीज कोविड से मिलते-जुलते लक्षण आने पर घर में बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के इलाज शुरू कर दे रहे हैं। एक-डेढ़ हफ्ता बीत जाने के बाद हालत बिगड़ने पर अस्पतालों पहुंचते हैं। कोविड होने की स्थिति में समय से सही उपचार न मिलने पर फेफड़े खराब हो जाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
केएन बरनवाल बताया कि सरकार ट्रैक, टेस्ट और ट्रीट की नीति पर कार्य कर रही है, जो लोग बिना जांच कराए मनमाने तरीके से इलाज कर रहे हैं उनसे इस नीति को धक्का पहुंच रहा है। ऐसे लोग खुद के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ तो कर रहे हैं दूसरों को भी जोखिम में डाल सकते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
कोविड टेस्ट के हैं कई फायदे
केएन बरनवाल के मुताबिक कोविड टेस्ट कराने से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए मरीज के संपर्क में आने वालों को तलाश कर उन्हें समय से आइसोलेट कर उपचार देने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि पॉजीटिव मरीज के घर प्रामाणिक औषधियां आरआरटी की मदद से पहुंचाई जाती हैं। आरआरटी उसे सलाह भी देती है। चिकित्सकों से परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। होम आइसोलेशन में मरीज का ऑब्जर्वेशन कर जल्द स्वास्थ्य लाभ में मदद की जाती है।
टेस्ट नहीं कराने से सरकारी लाभ से रहेंगे वंचित
एनके बरनवाल बताते हैं कि टेस्ट नहीं कराने से मरीज तक सभी सरकारी सुविधा और सेवाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता। अपुष्ट और अप्रामाणिक दवाएं मरीज के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। सही समय पर इलाज न मिलने से बीमारी जानलेवा हो सकती है। कोविड पॉजिटिव होने पर मरीज संपर्क में आने वालों को भी संक्रमित कर सकता है। संपर्क में आए लोग नये लोगों तक बीमारी का प्रसार करते हैं और कोविड चेन ब्रेक नहीं होती।