उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में दो महीने पहले काजल हत्याकांड से पूरा जिला दहल उठा था। पिता की पिटाई का वीडियो बना रही काजल को नाराज बदमाशों ने दौड़ाकर गोली मार दी थी। हजार कोशिश के बाद भी काजल ने गोली लगने के पांच दिन बाद लखनऊ में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। बहादुर बेटी जिंदगी की जंग हारकर जब गांव पहुंची तो पूरे गांव में चीत्कार गूंज रही थी। इलाके में मातम पसर गया था। एकलौती संतान की मौत का गम आज भी पिता को सता रहा है। जब भी बेटी के बारे में चर्चा होती है तो पिता फफक पड़ते हैं। उनका बिलखना देख कर हर किसी का कलेजा फट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि काजल हमेशा सबकी यादों में जिंदा रहेगी। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कि दुलारी बेटी को कैसे मिला इंसाफ...
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काजल गोलीकांड।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
जिले के गगहा इलाके के जगदीशपुर भलुआन गांव के राजू नयन सिंह बांसगांव कचहरी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उनका विजय प्रजापति से रुपये के लेनदेन का विवाद था। 20 अगस्त की रात विजय प्रजापति अपने चार साथियों के साथ आया और दरवाजा खुलवाया। राजू नयन के बाहर आते ही दबंगों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। काजल पिता की पिटाई का वीडियो बनाने लगी।
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मृत काजल व आरोपी विजय की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
इस पर विजय प्रजापति उग्र हो गया और उसे दौड़ाकर पेट में गोली मार दी थी। गोली की आवाज सुनकर पहुंचे लोगों ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस घायल काजल को स्वास्थ्य केंद्र फिर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची। अधिक रक्तस्राव होने के कारण मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया था।
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काजल हत्याकांड।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
लखनऊ में 23 अगस्त को काजल का ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। पेट में फंसी गोली को नहीं निकाला जा सका। ऐसे में 25 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
काजल की मौत के बाद इस मामले को लेकर पूरे देश में एक मुहिम छिड़ गई थी। लोग सोशल मीडिया पर काजल को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठा रहे थे। वहीं ग्रामीणों ने भी गोरखपुर-वाराणसी मार्ग को बंद कर घेराव किया था। इन सभी की मेहनत रंग लाई और पुलिस ने 9 सितंबर की रात मुठभेड़ में मुख्य आरोपी विजय प्रजपति को मार गिराया।