डॉ. अशोक पांडे के साथ पत्नी रचना मिश्रा व बेटा आयुष्मान।
- फोटो : अमर उजाला
खुद की तो सब सोचते हैं, समाज ही परिवार
पुलिस क्षेत्राधिकारी रचना मिश्रा कहती हैं परिवार, यह एक बड़ा शब्द है। अपनों के लिए तो सब जीते हैं। जिस दिन वर्दी पहनी उस दिन से समाज को ही परिवार मानने लगी। आज वह वक्त है, जब इस परिवार के लिए कुछ करने का समय है। शायद यही वजह है कि घर की जिम्मेदारियों को भूल गई हूं। पहली प्राथमिकता कोरोना संकट से जनता को बचाना है।
उन्होंने आगे कहा कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराना है। सुबह साढ़े नौ बजे घर से निकलना होता है। कोशिश सिर्फ ड्यूटी के दौरान आम लोगों को इस बीमारी से दूर रखने की होती है। हां, एक बात और कोई भूखा ना सोने पाए, इसका कुछ इंतजाम करके निकलती हूं। सुबह उठने के साथ ही घरवालों के लिए नाश्ते की व्यवस्था व अन्य लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करती हूं।