महंत दिग्विजय नाथ।
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गोरक्षपीठ के मूल में समाहित है सामजिक समरसता
योगी आदित्यनाथ उस विश्व प्रसिद्ध गोरक्षपीठ से हैं, जिसके मूल में ही लोक कल्याण और जातीय विभेद को समाप्त कर सामाजिक समरसता व एकजुटता को बढ़ावा देना शामिल है। सामाजिक समरसता को लेकर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ भी निरंतर अभियान चलाते रहे हैं। दोनों ब्रह्मलीन महंत ने साधु-संतों के साथ समाज के उस व्यक्ति के घर सहभोज आयोजित कराते थे, जिसे सामाजिक कुरीतियों के चलते अछूत माना जाता था। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने काशी के डोम राजा के घर सहभोज का एतिहासिक आयोजन कराकर यह संदेश दिया था कि समाज में सभी जातियों के लोग एक समान हैं। कोई छोटा-बड़ा नहीं है। अपने गुरुजनों की इसी परंपरा को योगी आदित्यनाथ निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। सांसद रहते हुए ही उन्होंने अनुसूचित जाति और अति पिछड़ी जातियों के घर सहभोज में शामिल होकर सामाजिक समरसता का बड़ा संदेश देना उनकी जीवनचर्या का हिस्सा रहा है।