गोरक्षनगरी में छठ का महापर्व धूमधाम से मनाया गया। गोरखपुर में गुरुवार की सुबह शहर के सभी घाटों पर भारी संख्या में व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही चार दिवसीय आस्था का महापर्व संपन्न हो गया। महिलाओं ने परिवार की सुख समृद्धि के लिए छठी मइया से कामना की। पूजन के साथ गीतों के जरिये छठी मैया के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। छठ महापर्व के अंतिम दिन भगवान भास्कर और छठी मइया की उपासना के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कोई दंडवत करते तो कोई सिर पर प्रसाद की टोकरी रखे नंगे पैर घाट पर पहुंचा। विधिविधान से छठी मइया की पूजा की। राप्ती में डुबकी लगाई और उदयमान (उगते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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Chhath Puja 2021
- फोटो : अमर उजाला।
शहर के राजघाट, सूर्यकुंड, गोरखनाथ, महेसरा, तकिया घाट, मानसरोवर, रामगढ़ताल सहित तमाम घाटों पर व्रती महिलाएं तड़के चार बजे से ही पहुंचने लगीं। इनके साथ बच्चे और परिवार के बाकी लोग भी थे। इन्होंने पूजन में सहयोग किया। राप्ती नदी में खड़ी, मांग से लेकर पूरी नाक तक सिंदूर लगाए महिलाओं के चेहरे से तेज झलक रहा था।
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गोरखनाथ मंदिर में भी छठ व्रत की छटा देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं भीम सरोवर पहुंचीं और सूर्य को अर्घ्य देकर संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। शहर के रुस्तमपुर, असुरन चौक, विष्णु पुरम, बौलिया कॉलोनी, कूड़ाघाट आवास विकास कॉलोनी, इंजीनियरिंग कॉलेज, बिलंदपुर, गोरखपुर विश्वविद्यालय, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर, शाहपुर, सहारा इस्टेट, गीता वाटिका सहित शहर के कई मुहल्लों एवं कॉलोनियों के आसपास अस्थायी तालाब बनाए गए हैं जहां व्रती महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चना की।
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- फोटो : अमर उजाला
भीगे वस्त्र में और हाथों में फल पकवानों से लदी टोकरी के साथ व्रतियों ने सूर्य देव की आराधना की। अंत में सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पुत्र की प्राप्ति, पति की दीर्घायु, रोगों से मुक्ति और परिवार में सुख शांति की कामना की। वहीं घाटों के अलावा कुछ श्रद्धालुओं ने घरों में और मोहल्ले में जलाशय बनाकर छठी मैया की पूजा की।
राप्ती नदी तट राजघाट पर आस्था उमड़ पड़ी। खुशनुमा माहौल था। नदी के दोनों तटों पर हजारों श्रद्धालु पूजा वेदी पर कलश स्थापित कर हाथ जोड़कर सूर्य के उगने की प्रतीक्षा कर रहे थे। वेदी के चारों तरफ दीप चल रहे थे। उगते समय श्रद्धालुओं ने दीप दिखाया और अर्घ्य देकर मंगल कामना की। इस दौरान जयघोष व मंगल गीत गूंजते रहे। बच्चों ने आतिशबाजी की। घाटों पर प्रकाश व सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी। मेला लगा था।