छठ महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को महिलाओं ने दिनभर खरना का निर्जल व्रत रखा। सूर्यास्त होने पर पूजा-अर्चना के बाद व्रती महिलाओं ने रसियाव और रोटी ग्रहण की। बुधवार यानी आज व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी और गुरुवार को उदयाचलगामी भास्कर को अर्घ्य देंगी। इसी के साथ चार दिनों के छठ महापर्व का समापन भी हो जाएगा। मंगलवार को दिनभर निर्जल उपवास रखने के बाद शाम में व्रतियों ने चूल्हे को स्थापित किया अक्षत, धूप, दीप व सिंदूर से इसकी पूजा की। प्रसाद के लिए रखे आटे से रोटी तथा साठी के चावल की खीर बनाई। इसे रसियाव रोटी भी कहते हैं। वहीं पर खरना अनुष्ठान किया।
ग्रह-नक्षत्रों के संयोग से शुभकारी होगी छठ
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, छठ के पहले दिन बुधवार को षष्ठी तिथि का मान दिन में एक बजकर 58 मिनट तक पश्चात सप्तमी है। नक्षत्र उत्तराषाढ़ है। यह रात को नौ बजकर 36 मिनट तक रहेगा। उत्तराषाढ़ का नक्षत्र स्वामी सूर्य ही हैं। इसलिए यह व्रतार्चन के लिए पूर्ण प्रशस्त और उत्तम है। इस दिन सर्यास्त शाम पांच बजकर 27 मिनट पर होगा। वहीं छठ पर्व के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को सूर्योदय 6 बजकर 34 मिनट पर है। इसी समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र है। जो निर्मल बुद्धि और वैभव की वृद्धि करने वाला रहेगा।
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Chhath Puja 2021
- फोटो : अमर उजाला।
अर्घ्य का मुहूर्त
बुधवार- 05:27 शाम
बृहस्पतिवार- 06:34 सुबह
शहर में बने अस्थायी घाट
छठ पूजा के लिए शहर के असुरन चौक, विष्णुपूरम, बशारतपुर, राजघाट, गोरखनाथ, मानसरोवर, सूर्यकुंड, डोमिनगढ़, रामगढ़ ताल, महेसरा ताल, विष्णु मंदिर, राप्तीनगर, रुस्तमपुर, सहारा इस्टेट और खरैया पोखरा के साथ तमाम मोहल्लों में अस्थायी घाट बनाए गए हैं।
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छठ माता की प्रतिमाएं स्थापित
कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मंगलवार को शहर के विभिन्न स्थानों पर छठ माता की प्रतिमा की स्थापना भक्तिभाव से की गई। सायंकाल पूजा-अर्चना कर प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई। छठ माता की प्रतिमा के पट खुलने के बाद इनके दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। छठ पूजा के बाद इन प्रतिमाओं को राप्ती नदी में विसर्जित कर दिया जाएगा।
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छठ मईया की गीत माहौल को बना रहे भक्तिमय
शहर में विभिन्न स्थानों पर छठ मईया के गीत माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। पूरे दिन छठ घाटों पर तेजी से काम चलता रहा। बैरिकेडिंग, पथ प्रकाश समेत अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित करने के लिए पूजन समितियों के साथ ही नगर निगम के कर्मचारी व स्वयंसेवक जुटे रहे।
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सिर पर दउरा ले घाटों पर पहुंचेंगे श्रद्धालु
छठ घाटों पर बुधवार की दोपहर से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। सिर पर पूजा सामग्री एवं प्रसाद से भरा दउरा लेकर व्रती महिलाओं के परिजन चलेंगे। शहर के राप्ती तट, सूर्यकुंड धाम, गोरखनाथ, महेसरा ताल, तकिया घाट, रामगढ़ ताल स्थित घाट पर दोपहर दो बजे से भीड़ जुटनी शुरू हो जाएगी। इन छठ घाटों का नजारा मेले जैसा नजर आएगा।
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सूर्यकुंड धाम में तैयारियां पूरी
सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से छठ महोत्सव आयोजन समिति ने सूर्यकुंड धाम में लगातार 29वें वर्ष आयोजित होने वाले छठ महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस वर्ष छठ पर्व ‘पर्यावरण महोत्सव’ के रूप में मनाया जाएगा और पर्यावरण मित्र बनने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। भोजपुरी गायक मनोज मिश्र मिहिर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि सदर सांसद रवि किशन एवं पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय मौजूद रहेंगी। यह जानकारी आयोजन समिति के संयोजक संतोष मणि त्रिपाठी ने दी।
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सांसद रवि किशन शुक्ला ने किया निरीक्षण
सदर सांसद रवि किशन शुक्ला ने मंगलवार को छठ घाटों का निरीक्षण किया। इस दौरान वह राप्ती तट पर स्थित राजघाट, रामघाट, हनुमानगढ़ी के साथ ही सूर्यकुंड धाम, मानसरोवर मंदिर और गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर पहुंचे। यहां छठ पूजा की तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही सदर सांसद ने गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। सांसद रवि किशन ने मंगलवार को बाजार जाकर छठ की खरीदारी भी की। सांसद ने सूपली, दउरा सहित अन्य सामान खरीदे।
जाफरा बाजार की शोभा श्रीवास्तव ने बताया कि संतान की मनोकामना के लिए व्रत का संकल्प लिया था। मां ने संतान देकर गोद भर दी। मन्नत पूरी होने के बाद से छठ व्रत करना शुरू कर दिया था। जब तक शक्ति रहेगी यह व्रत करती रहूंगी।
प्रयागपुरम की उषा सिंह ने बताया कि छठ माता से अब तक जो भी मांगा वह मिला है। छठ माता मांगी गई हर मन्नत पूरी करती हैं। उपवास रखकर मां की विधि-विधान से पूजा करूंगी और सभी के लिए मंगल कामना करूंगी।
गीता वाटिका की लीलावती देवी ने बताया कि सालों से छठ व्रत कर रही हूं। छठ माता के साथ ही सूर्यदेव में पूरे परिवार की आस्था है। छठ माता से आज तक जो भी मांगा उन्होंने पूरा किया। जब तक जान है ये व्रत करती रहूंगी।
लच्छीपुर की रूना सोनकर ने बताया कि छठ माता के लिए परिवार के सभी सदस्यों की गहरी आस्था है, शादी के बाद से ही छठ व्रत रख रही हूं। व्रत का यह सिलसिला मन्नत पूरी होने से शुरू हुआ था। जीवनभर व्रत करती रहूंगी।