उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोविड मरीजों को भर्ती कराने और बेड दिलाने में मदद करने के लिए बनाए गए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) और हेल्पलाइन का फायदा शनिवार को एक भी गंभीर कोरोना मरीज को नहीं मिल सका। कारण, किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में बेड खाली नहीं होना रहा। कंट्रोल रूम पर आने वाली हर कॉल पर मरीज या उसके तीमारदार को यही बताया गया कि कहीं भी बेड खाली नहीं हैं, कुछ देर बाद पता कीजिएगा। शाम छह बजे तक आईसीसीसी की मदद से कितने मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया इसकी जानकारी के लिए प्रभारी से संपर्क किया गया। कंट्रोल रूम में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि शनिवार को किसी भी अस्पताल में एक भी मरीज को भर्ती नहीं कराया जा सका है।
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कोरोना
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि वैसे तो सुबह से करीब दो हजार कॉल आ चुकी हैं लेकिन इनमें से चार सौ कॉल ऐसे गंभीर मरीजों के परिजनों की थीं जिन्हें तुरंत ऑक्सीजन युक्त बेड और चिकित्सा दिलाना बेहद जरूरी था। जिले में सरकारी अस्पतालों के अलावा करीब तीस निजी अस्पतालों को कोविड सेंटर बनाया गया है। सभी जगह कॉल करने पर एक ही उत्तर मिलता है कि अभी बेड खाली नहीं है।
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कोरोना
- फोटो : पीटीआई
कर्मचारी कहता है कि बेड खाली नहीं होने के कारण उन्हें गंभीर मरीजों के तीमारदारों से भी माफी मांगनी पड़ती है या एक दो घंटे बाद फोन कर जानकारी लेने का आश्वासन दिया जाता है। शनिवार को कोरोना के गंभीर मरीजों को बेड के लिए इंतजार ही करते रहना पड़ा उन्हें बेड नहीं मिल सका।
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मोबाइल यूज
- फोटो : SELF
हर मिनट आ रही कॉल
आईसीसीसी कर्मचारी के मुताबिक कमांड सेंटर पर कोरोना से संबंधित जानकारी लेने, मरीज भर्ती कराने में सहायता मांगने की कॉल लगभग प्रत्येक मिनट आ रही हैं। इनमें से अधिकतर कॉल तो सामान्य होती हैं लेकिन बीस फीसदी गंभीर होती हैं जिन्हें तुरंत ही मदद पहुंचाया जाना जरूरी होता है। तीस फीसदी कॉल दोबारा आती हैं, यानी ऐसे लोग कॉल करते हैं जिन्होंने थोड़ी देर पहले कॉल कर सहायता मांगी थी। वह दोबारा कॉल कर पूछते हैं कि क्या हुआ, कुछ व्यवस्था हो पाई या नहीं आदि। अस्पतालों में बेड दिलवाने से लेकर ऑक्सीजन की व्यवस्था, दवा किट की उपलब्धता सहित सैकड़ों तरह के सवाल पूछे जाते हैं जिनका संतोषजनक उत्तर देने का प्रयास किया जाता है।
कमांड सेंटर और अस्पतालों में बेहतर समन्वय की जरूरत
स्वास्थ्य सेवा मामलों के जानकारों का मानना है कि आईसीसीसी का बेहतर परिणाम तब ही निकलेगा जब कोरोना अस्पताल और सेंटर के बीच रियल टाइम समन्वय हो। दूसरे किसी भी अस्पताल में बेड खाली होने पर मरीज को आईसीसीसी की सलाह पर ही भर्ती किया जाए। इसके लिए आईसीसीसी में प्रतीक्षा सूची बनाई जानी चाहिए। उनके मुताबिक अभी हो यह रहा है कि निजी अस्पतालों में लोग अपने मरीज लेकर पहुंच जाते हैं। कोई बेड खाली हुआ तो उसमें वह मरीज रख लिया जाता है और आईसीसीसी को अस्पताल की तरफ से बताया जाता है कि बेड खाली नहीं है। यदि बेड खाली होते ही अस्पताल खुद आईसीसीसी को सूचित करें तब ही यहां से मरीजों को बेड मिल सकता हे अन्यथा यह सेवा भी बेवजह की कवायद ही साबित होगी।