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अमर उजाला में बेस संवाद का आयोजन, उदयपुर की तरह 'लेक सिटी' बनेगा गोरखपुर

Sun, 01 Mar 2020 12:56 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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amarujala base - फोटो : अमर उजाला।
उदयपुर की तर्ज पर गोरखपुर भी लेक सिटी के तौर पर विकसित होगा। 1700 एकड़ में फैले रामगढ़ ताल के सुंदरीकरण के साथ ही करीब 700 एकड़ क्षेत्रफल वाले चिलुआताल को भी संरक्षित करने और पर्यटन के लिहाज से  विकसित करने का काम चल रहा है। साफ-सफाई के बाद रामगढ़ ताल की ही तरह चिलुआताल के पास भी एक और नया सवेरा विकसित किया जाएगा। शहर ही नहीं बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटक भी वाटर स्पोर्ट्स समेत कई गतिविधियों का आनंद उठा सकेंगे। इसी तरह शहर के अन्य छोटे-बड़े तालाबों का भी संरक्षण एवं सुंदरीकरण होगा। जिला प्रशासन इनकी सूची तैयार कर रहा है। जल्द ही प्रस्ताव तैयार करने के साथ इन तालाबों के कायाकल्प में आने वाली अड़चनों को एक-एक दूर किया जाएगा।
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amarujala base - फोटो : अमर उजाला।
अमर उजाला के बिजनेस एकेडमिक एंड सोशल आंत्रपेन्योर  (बेस) एक्टिविटी के तहत शनिवार को सिटी कार्यालय में गोरखपुर एवं आसपास के  जिलों में पर्यटन की वर्तमान स्थिति, संभावना, चुनौतियां और समाधान विषय पर आयोजित संवाद में मंथन से विचारों के ये बहुमूल्य मोती निकले। अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले तीन सालों में गोरखपुर, पूरे पूर्वांचल ही नहीं बल्कि प्रदेश में भी पर्यटन के एक बड़े हब के तौर पर विकसित हो रहा है। इसे और भव्य स्वरूप देने के लिए यहां तमाम संसाधन मौजूद हैं। जरूरत है तो अपनी पुरानी धरोहरों, सभ्यता, संस्कृति और पर्यावरण के लिहाज से समृद्ध कुसम्ही आदि जंगलों की अहमियत समझने और उन्हें संरक्षित करने की। गोरखपुर के पास अपनी विरासत है। इसकी ख्याति देश, दुनिया में है।
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रामगढ़ताल। - फोटो : amar ujala
पर्यटन को नया पंख देने के लिए सभी का सहयोग जरूरी
पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय होने की वजह से दिल्ली, मुंबई, पंजाब, जम्मू, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत देश के कई कोनों से डेढ़ सौ के करीब ट्रेनें यहां से गुजरती हैं। एयरपोर्ट पर हवाई सेवाओं का विस्तार हो गया। नई दिल्ली के लिए तीन फ्लाइटें हो गई हैं तो मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, प्रयागराज शहर, एयर कनेक्टिविटी से जुड़ गए हैं। कई अन्य शहरों के लिए हवाई सेवा शुरू होने वाली है। एम्स संचालित होने लगा तो है तो मार्च में ही आयुर्वेद विश्वविद्यालय की नींव पड़ जाएगी। मेडिकल टूरिज्म, होटल टूरिज्म, धार्मिक टूरिज्म और रंगकर्म का बढ़ता दायरा, ये सभी जुड़कर, गोरखपुर में पर्यटन की उड़ान को नया पंख दे रहे हैं। पर्यटक अब गोरखपुर होकर कुशीनगर, लुंबिनी, नेपाल जा रहे हैं। पुलिस, पर्यटकों को सुरक्षा देने के साथ ही ट्रैफिक सिस्टम दुरुस्त करने में जुटी है। एक अच्छे नागरिक के तौर पर हमें भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने के साथ ही शहर को साफ-सुथरा रखना होगा।  

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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल। - फोटो : अमर उजाला।
लेक सिटी के तौर पर विकसित करने की कवायद शुरू
गोरखपुर तेजी से बदल रहा है। चिकित्सा, यातायात, शिक्षा, सड़कों के चौड़ीकरण के साथ ही यह शहर बड़े पर्यटन हब के तौर पर विकसित हो रहा है। गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, रामगढ़ ताल, तारामंडल, बौद्ध संग्रहालय, तरकुलहा देवी मंदिर, विनोद वन, बिस्मिल की शहीद स्थली के साथ ही ऐतिहासिक चौराचौरा स्मारक समेत बहुत सी धरोहरें पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मौजूद हैं। गोरखपुर से कुछ दूर कुशीनगर, लुंबिनी के अलावा नेपाल है। पर्यटन के लिहाज से गोरखपुर को और समृद्ध बनाने की दिशा में रामगढ़ ताल के बाद कई अन्य तालाबों का कायाकल्प करने की भी योजना बन रही है। चिलुआताल को सुरक्षित एवं उसके सुंदरीकरण की कवायद शुरू भी हो गई है। उदयपुर की तरह गोरखपुर को लेक सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा। गौरव सिंह सोगरवाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर
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डॉ. कौस्तुभ, एसपी सिटी - फोटो : अमर उजाला।
सेफ होगा गोरखपुर तो आएंगे पर्यटक
किसी भी पर्यटन केंद्र की लोकप्रियता उस क्षेत्र के सुरक्षित माहौल पर निर्भर करती है। लिहाजा हम गोरखपुर की पहचान देश-विदेश के पर्यटन नक्शे पर सेफ सिटी के तौर पर बनाना चाहते हैँ। गोरखपुर की पहचान धार्मिक नगरी के तौर पर भी है। गोरखनाथ मंदिर, तरकुलहा देवी, झारखंडी मंदिर समेत इमामबाड़ा, गीता प्रेस, गीतवाटिका की वजह से लाखों की तादात में पर्यटक शहर में आते हैं। सरकार की ओर से शहीद स्थल, प्राचीन मंदिरों की दशा को सुधारा जा रहा है। लाखों की संख्या में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रतिबद्ध है। खासकर रामगढ़ ताल के आसपास पर्यटकों की सुरक्षा के खास इंतजाम हैं। इसी लिहाज से रामगढ़ ताल थाना खुला। नौकायन केंद्र पुलिस चौकी भी बना दी गई। 14 सीसीटीवी कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली जाती है। शहरवासियों को जाम की समस्या से निजात दिलाने की कोशिश जारी है। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा रहा है। नौ चौराहों पर तकनीक का परीक्षण चल रहा है। 11 और चौराहों पर ऑटोमेटिक सिग्नल लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में पर्यटन का हब बनने की सभी विशेषताएं हैं। बस एक समवेत प्रयास की जरूरत है। जो इस समय सभी स्तरों पर दिखाई भी दे रहा है। डॉ. कौस्तुभ, एसपी सिटी
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अभिषेक कुमार सिंह, डायरेक्टर सेल्स एंड मार्केटिंग, होटल रेडिसन ब्लू। - फोटो : अमर उजाला।
होटल इंडस्ट्री की पहली पसंद बना गोरखपुर
पिछले तीन सालों में शहर को बदलते देखा और महसूस किया है। होटल इंडस्ट्री के लिए शहर पहली पसंद बन चुका है। नामचीन होटलों की चेन देखने को मिलेगी। होटल रेडिसन ब्लू आ चुका है। होटल मैरियट, ताज, हॉलीडे इन सहित कई होटल गोरखपुर में निवेश को तैयार हैं। कुशीनगर, कपिलवस्तु के साथ लुंबिनी घूमने जाने वाले पर्यटकों का ठहराव अब गोरखपुर में होता है। बुद्धिस्ट सर्किट का सबसे बड़ा होटल अपने शहर में ही मौजूद है। नौका विहार, चिड़ियाघर, रामगढ़ताल और गोरखनाथ मंदिर का लाइट एंड साउंड शो, गीता प्रेस ने शहर में आने वाले सैलानियों को ठहरने का एक अच्छा विकल्प दिया है। शहर में आने वाले देशी और विदेशी सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। एयर कनेक्टिविटी, ट्रेनों के फैले विशाल नेटवर्क ने पर्यटकों को बड़ी तेजी से लुभाया है। मगर अभी भी ट्रैफिक सिस्टम और पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने से पर्यटकों को परेशानी उठानी पड़ती है। इस दिशा में ठोस योजना बनाने की जरूरत है। अभिषेक कुमार सिंह, डायरेक्टर सेल्स एंड मार्केटिंग, होटल रेडिसन ब्लू
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डॉ. मनोज गौतम, उपनिदेशक राजकीय बौद्ध संग्रहालय। - फोटो : अमर उजाला।
सांस्कृतिक धरोहरों में हम धनवान, बस बनानी है पहचान
सांस्कृतिक धरोहरों के मामले में गोरखपुर के साथ-साथ आसपास के जिले भी बहुत धनी हैं। बस हमेें पर्यटन के नक्शे पर अपनी पहचान बनानी है। इनके बारे में यहां आने वाले पर्यटकों को बताए जाने की जरूरत है। होटल, रेस्टोरेंट प्रबंधन को आगे आना होगा। उन्हें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासतों की जानकारी बोर्र्ड,  फ्लैक्स के माध्यम से डिस्प्ले करना होगा, तभी यहां आने वाले सैलानियों को सटीक जानकारी मिल सकेगी। पर्यटकों को रेलवे और बस स्टेशनों पर सूचना देने के लिए केंद्र स्थापित किए जाने की जरूरत है। जो ये बता सके कि कौन सी धरोहर कहां और कितनी दूरी पर है। यात्रा के लिए कौन कौन से विकल्प हैं। कितना खर्च आएगा। भोजन और ठहरने की व्यवस्था क्या होगी। शहर में हजारों की किलोमीटर दूर से आने वाले पर्यटक की पहली प्राथमिकता सही जानकारी होती है। सरकार की ओर से प्रेक्षागृह, गोरक्षशोध पीठ, राजकीय बौद्ध संग्रहालय को चमकाने के लिए बजट जारी किया गया है। सभी पर काम चल रहा है। डॉ. मनोज गौतम, उपनिदेशक राजकीय बौद्ध संग्रहालय

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दुर्गेश, व्यवस्थापक गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
योगी सरकार ने बदली सूरत
योगी सरकार ने तीन साल में शहर की सूरत को बदलकर रख दिया है। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद वे गोरखपुर के बारे में सोचते रहते हैं। नतीजा, किसी भी परियोजना के नाम पर सरकार ने धनराशि की कमी नहीं की है। तेजी से निर्माण कार्य हो रहे हैं। सड़कें चौड़ी की जा रही हैं।  रामगढ़ताल पर वाटर स्पोर्ट्स की शुरूआत हो चुकी है। धार्मिक, एतिहासिक विरासत सजोने वाला गोरखपुर जल्द ही पर्यटन के नक्शे पर अहम पड़ाव बनाएगा।  चिड़ियाघर भी बनकर तैयार है।  दुर्गेश, व्यवस्थापक गोरखनाथ मंदिर

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डॉ. अदिति अग्रवाल, सीनियर रेजिडेंट बीआरडी मेडिकल कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला।
मेडिकल टूरिज्म के लिहाज से गोरखपुर में गजब संभावनाएं
एम्स की स्थापना के साथ ही मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भी गोरखपुर तेजी से बढ़ रहा है। पहले नार्मल सर्जरी या परीक्षण के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता था। अब ब्रेन और न्यूरो सर्जरी जैसे जटिल आपरेशन भी सरकारी अस्पतालों में हो रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में जबरदस्त सुधार हुआ है। जल्द ही गोरखपुर मेडिकल टूरिज्म के नक्शे पर चमकेगा। डॉ. अदिति अग्रवाल, सीनियर रेजिडेंट बीआरडी मेडिकल कॉलेज

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अमित सिंह पटेल, अध्यक्ष जागरूक गोरखपुर (जागो)। - फोटो : अमर उजाला।
टेराकोटा को मिले बढ़ावा
टेराकोटा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जुड़ा है, मगर उसे अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल रहा है। यहीं के उत्पादों को बाहर के शहरों में अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है। मगर इसका जनक औरंगाबाद उदासीनता का शिकार बना है। जागरूकता से इसे इसका हक दिलाया जा सकता है। यातायात की समस्या से निजात पाकर भी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। अमित सिंह पटेल, अध्यक्ष जागरूक गोरखपुर (जागो)

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अरुणेश, डायरेक्टर ट्रू डील। - फोटो : अमर उजाला।
ऊर्जा देती है कोई भी यात्रा
किसी भी प्रकार की यात्रा ऊर्जा देती है। आधारभूत संरचना को सुधारने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। सभी परियोजनाओं पूरी होने पर शहर की शक्ल पूरी तरह से बदल जाएगी। पर्यटक गोरखपुर आएं और कम दाम पर धार्मिक, एतिहासिक स्थलों तक जाएं, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। अरुणेश, डायरेक्टर ट्रू डील

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राणा देवेंद्र प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
खुद की सोच में भी बदलाव लाने की जरूरत
ट्रैफिक व्यवस्था को बनाए रखने में पुलिस जुटी है। थोड़ी सी जागरूकता से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है। इसके लिए खुद की सोच में बदलने की जरूरत है। सुरक्षा पर खास ध्यान है। रामगढ़ ताल बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है। इस बार 20 हजार लोगों ने रामगढ़ ताल व नौकायन केंद्र पहुंचकर नए वर्ष का जश्न मनाया था। ऐसा पहली बार हुआ। राणा देवेंद्र प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर रामगढ़ताल

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सोनिका सिंह, निदेशक यामिनी कल्चरल इंस्टीट्यूट। - फोटो : अमर उजाला।
कुसम्ही जंगल को विकसित किया जाए
रामगढ़ ताल को खूबसूरत तोहफा माना जाना चाहिए। जिस तरह से वाराणसी में गंगा घाटों पर सुबह बनारस का आयोजन होता है, वैसे ही रामगढ़ ताल के पास होना चाहिए। क्लासिकल डांस को पर्यटक पसंद करते हैं। शहर से सटे कुसम्ही जंगल को संरक्षित करने के साथ ही पर्यटन की संभावनाएं तलाशने की जरूरत है। इको टूरिज्म के रूप में इसे विकसित किया जा सकता है। सोनिका सिंह, निदेशक यामिनी कल्चरल इंस्टीट्यूट 

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कृतिका मालवीय, स्टूडेंट, आईटीएम गीडा। - फोटो : अमर उजाला।
शिक्षा की गुणवत्ता भी पर्यटन को देगी बढ़ावा
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जाए तो शहर में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी। इससे भी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत न हो इसपर भी सरकार का फोकस होना चाहिए। गोरखपुर विश्वविद्यालय में नेपाल के विद्यार्थी पढ़ते हैं। सुविधा-संसाधन औ बेहतर किया जाए तो और विदेशी आएंगे। मेडिकल, तकनीकी शिक्षा का हब भी गोरखपुर बन रहा है।कृतिका मालवीय, स्टूडेंट, आईटीएम गीडा
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हेमलता त्रिपाठी, कोआर्डिनेटर आरपीएम एकेडमी सिविल लाइंस। - फोटो : अमर उजाला।
आने वाली पीढ़ियों को महत्ता बताने की जरूरत
वाराणसी की प्राचीनता वहां के लोगों आचार-व्यवहार  में बसी है। इसी वजह से शहर के क्योटो की तर्ज पर विकसित किए जाने का  विरोध हुआ। गोरखपुर भी प्राचीन विरासत को समेटे है। अपनी पीढ़ियों के मूल्यों को समझकर आगे बढ़ना होगा। शिक्षा के क्षेत्र में गोरखपुर आगे है। बेसिक, माध्यमिक, उच्च, तकनीकी और मेडिकल एजूकेशन में जबरदस्त सुधार हुआ है। हेमलता त्रिपाठी, कोआर्डिनेटर आरपीएम एकेडमी सिविल लाइंस
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