बसंत पंचमी 2021।
- फोटो : अमर उजाला।
बसंत पंचमी की कथा
पंडित राकेश पांडेय के अनुसार पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्माजी सृष्टि की रचना करके जब देखा तो चारो ओर उदासी सा वातावरण नजर आता था, जैसे किसी की वाणी न हो। यह देखकर ब्रह्माजी ने उदासी और मलिनता को दूर करने के लिए अपने कमंडलु से जल छिड़का। उन जलकणों के पड़ते ही वृक्ष से एक शक्ति उत्पन्न हुई जो दोनों हाथों से वीणा बजा रही थीं एवं दोनों हाथों में क्रमशः पुस्तक तथा माला धारण किये थी। ब्रह्माजी ने उस देवी से वीणा बजाकर संसार की मूकता तथा उदासी दूर करने को कहा, तब उस देवी ने वीणा के आवाज से सब जीवों को वाणी प्रदान की। उस देवी को सरस्वती कहा गया।