आशा देवी
- फोटो : अमर उजाला।
आशा देवी के मुताबिक, टीबी मरीजों का इलाज बीच में न छूटे और उन्हें उचित सलाह मिले, इसे मिशन के तौर पर लिया है। दवा का कोर्स पूरा करना कितना महत्वपूर्ण है, आशा ने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया। बताया कि क्षेत्र के एक मरीज ने दवा बीच में छोड़ दी। अब उसकी बहू को भी टीबी की बीमारी हो गई है। बताया कि घर जाकर दवा पहुंचाते हैं। मरीजों को बताते हैं कि खांसते-छींकते समय मास्क या कपड़े का इस्तेमाल करें।