फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला बाल मेला: चिड़ियाघर के आंगन में सजा बाल उमंगों का मेला, प्रतिभा को मिला मंच तो चमके चेहरे

Sat, 02 Dec 2023 10:25 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

बच्चों की आपसी बतकही और मुस्कान, उत्साह और कौतूहल जाहिर कर रही थी कि सभी को जल्द से जल्द भीतर जाना है। चिड़ियाघर की सैर करनी है। ड्राइंग कंपटीशन में हुनर आजमाना है तो वहीं गीत-संगीत का स्टेज भी बच्चों का इंतजार कर रहा है।
विज्ञापन
1 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले में सुबह के साढ़े आठ बजे थे, हल्की सर्दी में सूरज की मुलायम किरणें खुशनुमा ऊष्मा दे रही थी। शहीद अशफाक उल्लाह खां चिड़ियाघर के मुख्य द्वार पर चहल-पहल बढ़ चुकी थी। स्कूल वाहनों की कतारें बढ़ती गईं। इन वाहनों से उतरते बच्चों के अनुशासित कदम कतारबद्ध होते हुए चिड़ियाघर के प्रवेश द्वार का रुख कर लिए।


 
विज्ञापन

2 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
बच्चों की आपसी बतकही और मुस्कान, उत्साह और कौतूहल जाहिर कर रही थी कि सभी को जल्द से जल्द भीतर जाना है। चिड़ियाघर की सैर करनी है। ड्राइंग कंपटीशन में हुनर आजमाना है तो वहीं गीत-संगीत का स्टेज भी बच्चों का इंतजार कर रहा है। भीतर दाखिल होते बच्चे ओपन ऑडिटोरियम पर नजर डालते आगे बढ़ते गए। अब किसी को जंगल के राजा को देखने की ललक थी तो किसी की नजरें अजगर और मगरमच्छ को तलाश रही थीं।

 
विज्ञापन

3 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
बच्चों का एक ग्रुप तितली घर में पहुंचा। पूरी तरह पैक तितलीघर में मुरझाए पौधों से तितलियां गायब हैं। यहां से बच्चे सांप घर में पहुंचे, शीशे के दरवाजों से बंद कमरों में अजगर नजर आए, नवल्स एकेडमी का आकाश साथी वैभव से सवाल करने लगा, इन्हें शीशे के दरवाजे में क्यों रखा गया है, मासूम और सचेत करने वाला जवाब आता है, अजगर इंसान को भी निगल जाते हैं। सांप घर से बच्चे निकले हैं और सामने मैदान में लोक गायकों की मंडली गाती नजर आई। कुछ पल को कदम थमते हैं लेकिन फिर सभी आगे बढ़ जाते हैं।

 

4 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
तालाब से बाहर अलग किनारों पर दो-तीन मगरमच्छ निष्क्रिय पड़े दिखे। कोई मगरमच्छ देव तो कोई घड़ियाल भाई कहकर पुकारने लगा, हरकत नहीं होती है तो शोर भी मचाते हैं फिर भी कोई हलचल न देख बच्चे आगे बढ़ गए। तेंदुए, बाघ, सियार और गिद्ध के बाड़े के सामने पहुंचे बच्चों में कोई हैरत जाहिर करता दिखा तो कोई टीवी और सोशल मीडिया से हासिल जानकारी के मुताबिक चर्चा में मशगूल। लकड़बग्घे को देख संस्कृति पब्लिक स्कूल की आकांक्षा साथ आई स्मिता से कहने लगी, डिस्कवरी पर देखा था लकड़बग्घों का झुंड कई बार शेर का भी शिकार कर लेता है।

 
विज्ञापन

5 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
चिड़ियाघर का फेरा पूरा हो चुका था। साथ गए शिक्षक-शिक्षिकाएं इन लम्हों को सेल्फी और सामूहिक तस्वीरों में सहेजने लगे। लोक गायकों की मंडली भी बाल कद्रदानों की भीड़ से ढक चुकी है। फरुवाही नृत्य का रंग जमा हुआ था। चिड़ियाघर की सैर कर अलग-अलग समूहों में बच्चे ओपन ऑडिटोरियम की ओर लौटने लगे, न थकन और न ही उबन... बस उल्लास ही उल्लास। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज हो चुका था, एक मासूम आवाज में मेरे रश्क-ए-कमर... गीत की मिठास पर गूंजती तालियां फिजा में घुल रही थी...।

 
विज्ञापन

6 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
हाथी राजा को तलाशते पूरी हो गई सैर
चिड़ियाघर में बारहसिंघे दिखते हैं, हिरन भी धमाचौकड़ी करते नजर आते हैं। अपने घेरे में सियार भी इंसान की आहट पर भाग निकलते हैं। गिद्धराज जटायु अपने बड़े पंखों से छोटी उड़ान भरते हैं। दरियाई घोड़ा और वृहद आकार वाले गैंडे दिख रहे हैं। इन सबके बीच ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की रिया पूरे भ्रमण के दौरान हाथी राजा को तलाश रही हैं। क्लासमेट शिवानी बताती है कि गोरखपुर चिड़ियाघर में हाथी है ही नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
गोरखपुर में अमर उजाला बाल मेला। - फोटो : अमर उजाला।
बच्चों ने ललकारा पर सोते रहे जंगल के राजा
बच्चों के समूह जानवरों के बाड़े के सामने पहुंचने पर उनकी हरकत तलाश रहे थे। बच्चों में किसी को शेर की दहाड़ सुननी है तो कोई तेंदुए की आवाज सुनना चाहता है। इसके लिए बाल मन में जो भी तरीका आता है आजमाया। कभी सभी मिलकर एक साथ आवाज लगाते हैं तो कभी शोर मचाते हैं। जंगल के राजा शेर के बाड़े के सामने ये सारी कवायद नाकाम साबित होती है, शोर और ललकार के बाद भी जंगल के राजा सोते ही रह जाते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें