कोरोना संक्रमण से कहीं ज्यादा खतरा भय वाले माहौल से है। अगर हौसला कायम हो और माहौल अनुकूल मिले तो इस खतरनाक बीमारी को मात दी जा सकती है। कुछ ऐसे ही कर दिखाया है भाटपाररानी, देवरिया की रहनेवाली संध्या देवी (62 वर्ष) ने।
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कोरोना वायरस।
- फोटो : PTi
उनकी सांसें फूलने लगीं तो घर वालों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। जीने की ललक और बुलंद हौसले के बलबूते बुजुर्ग महिला ने न सिर्फ कोरोना को मात दी बल्कि तीन दिनों में ही रिपोर्ट निगेटिव आने पर अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर चलीं गईं।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
संध्या देवी का हौसला बढ़ाने में उनके बेटे और बेटी ने भी अहम भूमिका निभाई। हर वक्त सकारात्मक माहौल बनाए रखा। फोन पर भी बात की तो रिपोर्ट के बारे में अच्छी जानकारी देकर उन्हें खुश रखा। उनकी बेटी दीपमाला श्रीवास्तव बतातीं हैं कि वे मुंबई में थीं। गांव में घर पर मां को सांस लेने में तकलीफ हुई और हल्का बुखार आया था। भाई ने जब मां को डॉक्टर को दिखाया तो उनका ऑक्सीजन लेवल 78 था। डॉक्टर ने भर्ती कराने की सलाह दी।
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कोविड
- फोटो : अमर उजाला
उन्हें लेकर जिला अस्पताल देवरिया गए तो कोविड जांच नहीं हो पाई। इसलिए भर्ती नहीं कर रहे थे। रात में भर्ती कर ऑक्सीजन लगाया गया। कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद वहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। दूसरे दिन मेडिकल कॉलेज आ गए, यहां जांच हुई तो रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। कोविड वार्ड में बड़ी मशक्कत के बाद भर्ती कराया गया। मैं भी फ्लाइट से गोरखपुर आ गई। यहां ऑक्सीजन सपोर्ट पर मां को रखा गया।
ऑक्सीजन लेवल 65 पर आ गया था पर मां ने हिम्मत नहीं हारी। वह कहती रहीं जल्दी ही ठीक हो जाऊंगी। हम लोगों ने भी फोन पर बात की तो उनका हौसला बढ़ाया। तीन दिनों बाद उनका ऑक्सीजन लेवल 92 से 94 के बीच आ गया। कोरोना की जांच हुई तो रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई। उसके बाद डिस्चार्ज कराकर घर लेते आए। अब वह बिल्कुल ठीक हैं।