इस साल के सात महीनों में गोरखपुर जिले में टीबी के 5897 मरीज मिले हैं। जनवरी माह से लेकर 31 जुलाई के बीच हर दिन औसतन टीबी के 28 मरीज मिले हैं। कुल संख्या में निजी अस्पतालों के 2550 मरीज भी शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के 2025 तक टीबी मुक्त जिला मुहिम को झटका लगना तय है।
जानकारी के मुताबिक इन मरीजों की उम्र 25 से 65 वर्ष के बीच है। इनमें 70 फीसदी पुरुष और 30 फीसदी महिला मरीज शामिल हैं। वहीं पिछले 31 महीनों की बात करें तो टीबी के कुल 26025 मरीज मिल चुके हैं। इसमें सात माह ऐसे रहे हैं, जिनमें कोरोना महामारी की वजह से मरीजों की जांच नहीं हो सकी है। वरना यह आंकड़े बढ़ने तय थे। यह बात खुद विभाग भी स्वीकार कर रहा है। यही वजह है कि विभाग ने जियो टैगिंग के तहत मरीजों को ढूंढने का काम किया है। इसमें आशा, आंगनबाड़ी वर्कर का सहयोग लिया गया। इसके तहत 13561 लोगों के घरों तक टीम पहुंची है। इन घरों में पहुंचकर मरीजों की स्थिति जानी गई। जानकारी मिली कि है कि कई मरीजों ने कोविड काल में दवा बंद कर दी। इसकी वजह से मरीजों का मर्ज बढ़ गया है। फिलहाल विभाग ऐसे मरीजों के फालोअप में जुट गया है। उन्हें निशुल्क दवाएं दी जा रहीं हैं।
विज्ञापन
2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
ये लक्षण दिखें तो कराएं टीबी की जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल टीबी की जांच कराएं।
विज्ञापन
3 of 5
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
इन मामलों में भी टीबी की जांच जरूरी
डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि अगर कोई कोविड मरीज ठीक हो जाता है और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, फिर भी खांसी नहीं रुक रही है तो उसकी टीबी जांच अवश्य कराएं। कोविड के लक्षण वाले व्यक्ति की जांच कराने पर अगर रिपोर्ट निगेटिव है तब भी टीबी जांच अवश्य करवा लें। इस समय टीबी की ट्रूनेट विधि से जांच की सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र के अलावा सीएचसी पिपराईच, सीएचसी भटहट, सीएचसी कैंपियरगंज, पीएचसी खोराबार, सीएचसी बड़हलगंज और सीएचसी सहजनवां में भी उपलब्ध है।
4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
एक नजर आंकड़ों पर
वर्ष मरीज
2019 11473
2020 8658
2021(31 जुलाई तक) 5894
साढ़े पांच करोड़ रुपये भेजी गई सहायता राशि
जिले में पिछले तीन वर्षों के अंदर 21,182 मरीजों के खाते में सहायता राशि के तौर पर पांच करोड़ 42 लाख रुपये भेजे गए हैं। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीजों को प्रति माह 500 रुपये बेहतर खानपान के लिए भेजे जाते हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि कोविड महामारी के बीच कुछ माह तक टीबी अभियान प्रभावित रहा। लेकिन, जैसे ही महामारी की रफ्तार कम हुई फिर से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। अब तक छह हजार के आसपास टीबी के मरीज मिल चुके हैं। इनमें सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज कराने वाले मरीजों को निशुल्क दवाएं और सुविधाएं दी जा रहीं हैं।