रोहिताश्व गौड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रोहिताश्व गौड़ बताते हैं, ‘‘ये सन् 1990 की बात है, संजय, विनीत और मैं, मुंबई के सांताक्रूज में किराए के एक अपार्टमेंट में साथ रहते थे। वो एयरपोर्ट के काफी करीब था। भयानक गर्मी वाली एक रात हमने छत पर ही सोने का फैसला किया, क्योंकि वहां मकान मालिक के बेटे का बर्थडे मनाया जा रहा था और हमें गर्मी से राहत भी पानी थी। लेकिन हम इस बात से बेखबर थे कि ऊपर लगे टैंक से पानी गिरा हुआ है।”