साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रघुवरन जब हिंदी सिनेमा में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार की फिल्म 'इज्जतदार' में पहली बार नजर आए तो इंडस्ट्री में इस बात की चर्चा होने लगी कि इंडस्ट्री में अचानक यह विलेन कहां से आ गया।
साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रघुवरन जब हिंदी सिनेमा में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार की फिल्म 'इज्जतदार' में पहली बार नजर आए तो इंडस्ट्री में इस बात की चर्चा होने लगी कि इंडस्ट्री में अचानक यह विलेन कहां से आ गया। राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'शिवा' में रघुवरन का गैंगस्टर भवानी चौधरी का ऐसा किरदार था जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं। फिल्म 'लाल बादशाह' में बिग बी की आंखों में दहशत ला देने वाले रघुवरन हिंदी सिनेमा के सबसे खतरनाक विलेन साबित होते, लेकिन उनकी शोहरत का सूरज भरी दोपहर अस्त हो गा। रघुवरन की पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें।
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इज्जतदार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दिलीप कुमार की फिल्म से शुरुआत
निर्माता सुधाकर बोकाडे की हिंदी फिल्म 'इज्जतदार' से रघुवरन ने हिंदी सिनेमा के एंट्री की। साऊथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक के बपैया के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रघुवरन हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के साथ नजर आए। इस फिल्म में रघुवरन ने दिलीप कुमार के दामाद इंद्रजीत सभरवाल की भूमिका निभाई थी, जिसकी वजह से दिलीप कुमार को जेल की सजा हो जाती है। इस फिल्म के रीलीज के बाद रघुवरन की खूब चर्चा हुई। रघुवरन ने फिल्म में ऐसे विलेन की भूमिका निभाई थी, जिसे देखकर दर्शकों को नफरत हो गई और यही एक कलाकार की सबसे बड़ी कामयाबी थी।
फिल्म 'इज्जतदार' 16 मार्च 1990 को रिलीज हुई थी। इसी साल 7 दिसंबर 1990 को रामगोपाल वर्मा की फिल्म 'शिवा' रिलीज हुई। इस फिल्म में रघुवरन ने गैंगस्टर भवानी चौधरी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में रघुवरन का गैंगस्टर भवानी चौधरी का ऐसा किरदार था जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं। इस फिल्म के अलावा रघुवरन ने सुनील शेट्टी की फिल्म 'रक्षक', अमिताभ बच्चन की फिल्म 'लाल बादशाह' मिथुन चक्रवर्ती की 'हिटलर' और जैकी श्रॉफ की फिल्म 'ग्रहण' में काम किया। रघुवरन ने भले ही फिल्म 'इज्जतदार' से हिंदी सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन रघुवरन को राम गोपाल वर्मा की खोज माना जाता है।
रघुवरन ने भले ही कई फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई, लेकिन एक समय ऐसा भी जब उन्हें यह महसूस होने लगा कि अभिनेता के बजाय अगर वह किसान रहे होते तो ज्यादा खुश होते। रघुवरन ने खुद ही एक इंटरव्यू के दौरान अपने दिल की बात की थी। उन्होंने कहा, 'मैं एक किसान के रूप में जीवनयापन करके अधिक खुश होता। मैं अपनी फसल बेचने से जो भी थोड़ी-बहुत कमाई करता, उससे संतुष्ट रहता। मैं अपनी फसलों को देखता और बारिश की उम्मीद में सो जाता। मैं मुर्गिया, भेड़ें और कुत्ते पालता और उन्हें खाना खिलाता । मुझे अपने साथ रखने के लिए सिर्फ एक व्यक्ति की आवश्यकता होती। यही जीवन है। हम जो जी रहे हैं वह नहीं है।'
रघुवरन ने रजनीकांत की कई फिल्मों में काम किया। कहा जाता है कि रजनीकांत की जिस भी फिल्म में रघुवरन का रोल होता था वह फिल्म सुपरहिट हो जाती थी। इन्हीं हिट फिल्मों की वजह से रजनीकांत, रघुवरन को अपना लकी चार्म मानने लगे थे। रजनीकांत ने इस बात को एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि 'बाबा' से लेकर 'बाशा' तक उनकी कई फिल्में रघुवरन की बदौलत हिट रहीं। रघुवरन के इसी गोल्डन टच को महसूस कर रजनीकांत ने निर्देशक शंकर से रघुवरन को फिल्म 'शिवाजी' में लेने की गुजारिश की और कहा कि रघुवरन को भी इस फिल्म में कोई रोल दिया जाना चाहिए। रजनीकांत के कहने पर रघुवरन को फिल्म में ले लिया गया और ये फिल्म जबरदस्त हिट रही।
एक बार शूटिंग के दौरान रजनीकांत ने रघुवरन से ऐसे ही पूछ लिया कि आगे क्या करना है? उस समय रजनीकांत अपने स्टारडम के शिखर पर थे। रजनीकांत के सवाल का जवाब देते हुए रघुवरन ने कहा, 'सर, आप अपनी फिल्मों में होने वाली ये सारी लड़ाई छोड़ दीजिए। आप जाइए और बाहर सड़कों पर होने वाली सभी लड़ाइयों को रोककर शांतिदूत के रूप में काम कीजिए।’ यही आपको अगले स्तर तक लेकर जाएगा। रघुवरन की यह बात सुनकर रजनीकांत खूब जोर से हंसे।
रघुवरन दिग्गज अभिनेता रहे ही, साथ ही वह बहुत अच्छे संगीतकार और गायक भी थे। उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज लंदन से पियानो भी सीखा था। रघुवरन ने एक म्यूजिक अलबम भी बनाया था जिसकी संगीत रचना उन्होंने खुद ही की थी और अलबम के सभी गाने भी खुद ही गाए थे। इस अलबम में छह गाने थे, जिसमें से दो गाने रघुवरन ने खुद ही लिखे थे। रघुवरन की मृत्यु के बाद रजनीकांत ने 'रघुवरन - ए म्यूजिकल जर्नी' के नाम से यह अलमब लांच किया था उस अवसर पर रघुवरन की पत्नी रोहिणी और उनके बेटे ऋषि वरन मौजूद थे।
रघुवरन का जन्म 11 दिसंबर 1958 को होटल व्यवसायी चंकमन्नाथु एनआर वेलायुधन नायर के घर केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेनगोडे शहर में हुआ। उनके पिता ने अपने होटल व्यवसाय को कोयंबटूर में स्थानांतरित कर लिया। रघुवरन की प्राथमिक शिक्षा स्टेन्स एंग्लो इंडियन हायर सेकेंडरी स्कूल कोयंबटूर से हुई। उसके बाद उन्होंने कोयंबटूर के सरकारी कला महाविद्यालय में स्नातक में दाखिला लिया, लेकिन अभिनय की वजह से पढाई छोड़ दी। उन्होंने कन्नड़ फिल्म 'स्वप्ना थिंगलगल' में एक छोटी भूमिका से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में तेलुगु और कन्नड़ की कई फिल्मों में छोटी- छोटी भूमिकाएं करने लगे। रघुवरन ने मशहूर अभिनेता नासर के साथ थियेटर ग्रुप में भी काम किया।
शुरुआत में रघुवरन को साउथ फिल्म इंडस्ट्री ने गंभीरता से नहीं लिया और न ही उनके लिए बढ़िया किरदार ही लिखे गए। इसकी वजह से रघुवरन कैरेक्टर रोल में ही सीमित रह गए। लेकिन धीरे-धीरे रघुवरन ने अपने लिए ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया कि साउथ का हर सुपरस्टार उनके साथ काम करने के सपने देखता। रघुवरन ने अपने दौर के हर लीडिंग स्टार के साथ काम किया। अपनी डायलॉग डिलीवरी के नायाब अंदाज और स्टाइल से रघुवरन जल्द ही लोगों के चहेते स्टार बन गए। रघुवरन साउथ की फिल्म 'सिल्क सिल्क सिल्क' से सुर्खियों में आए।
रघुवरन-लाल बादशाह
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हीरो से विलेन
1980 के दशक के मध्य में रघुवरन ने बतौर हीरो कई फिल्में की और उनमें से ज्यादातर फिल्मों ने अच्छा बिजनेस भी किया। जिसमें 'माइकल राज' , 'मेगम करुथिरुक्कु' , 'कुट्टु पुझुक्कल' और 'कविथाई पाडा नेरामिलई' आदि कई फिल्में शामिल है। फिल्मों में नायक की भूमिका निभाने के साथ - साथ रघुवरन सहायक अभिनेता और खलनायक की भूमिकाएं करने लगे जो उनके नायक बनने के करियर में बाधा बनी। लेकिन विलेन बनकर साउथ और हिंदी सिनेमा में ऐसे छाए की उनकी अदाकारी को आज भी याद किया जाता है।
रघुवरन ने साल 1996 में अभिनेत्री रोहिणी से शादी की। शादी के कुछ समय के बाद पति - पत्नी के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे, जिसकी वजह से रघुवरन तनाव में रहते थे और तनाव से मुक्ति के लिए शराब और ड्रग्स का सेवन करने लगे। रघुवरन को पहले से डायबिटीज की शिकायत थी। साल 2000 में उनके बेटे ऋषि वरन का जन्म हुआ। बाद में दोनों अलग हो गए और साल 2004 में तलाक हो गया। तलाक के बाद रघुवरन और टूट गए और शराब का सेवन ज्यादा करने लगे। 19 मार्च 2008 को मृत्यु हो गई। मृत्यु का कारण अत्यधिक शराब के सेवन के कारण अंगों की विफलता थी।