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Ayodhya Ram Mandir: ‘लक्ष्मण’ की उपेक्षा से आहत सुनील लहरी, बोले, इसमें भी राम की कोई न कोई कृपा जरूर होगी

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सुनील लहरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अगले महीने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रितों की सूची जब से सार्वजनिक हुई है, इसे लेकर मुंबई फिल्म जगत में तमाम चर्चाएं जारी हैं। जिन लोगों को इस कार्यक्रम के आमंत्रण आए हैं, वह श्रीराम कृपा से अभिभूत हैं। कुछ लोग निमंत्रण न मिलने के बाद व्यग्र भी हैं लेकिन अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करने से बच रहे हैं। लेकिन, रामानंद सागर के धारावाहिक ‘रामायण’ में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी इसे ज्यादा चित से लगाने की आवश्यकता नहीं समझते। वह कहते हैं, ‘आमंत्रण तो मुझे भी नहीं मिला। हो सकता है आयोजन समिति को रामकथा में लक्ष्मण की प्रासंगिकता समझ न आई हो लेकिन पूरे रामचरित मानस में यही एक चरित्र है जिसने वनवास का निर्देश न होते हुए भी राम के साथ वनगमन किया और अपनी पत्नी से दूर रहते हुए अपनी मां के संकल्प को पूरा किया।’
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सुनील लहरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
60 बरस से ऊपर के हो चुके सुनील लहरी इन दिनों भी पूरी तरह से मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं। वह बताते हैं, ‘अभी हमने सागर प्रोडक्शंस के साथ मिलकर वैष्णो देवी पर एक सीरीज का निर्माण किया है। इसे पहले फिल्म के रूप में सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की तैयारी है और फिर इसके बाद इसे ओटीटी पर सीरीज के रूप में रिलीज किया जाएगा। कुछ और योजनाओं पर भी काम चल रहा है जिसमें से एक योजना उन क्षेपक कथाओं के फिल्मांकन की है जो रामकथा के बीच बीच में अन्य किरदारों की पृष्ठभूमि के रूप में देश के संत महात्मा सुनाते रहते हैं।’
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सुनील लहरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी पिछली उत्तर प्रदेश यात्रा के बारे में जिक्र चलने पर सुनील बताते हैं, ‘पिछले साल मैं लखनऊ गया था। एक व्यवसायी परिवार की 17 साल की किशोरी ने लक्ष्मण और उर्मिला की प्रेम कथा पर एक सुंदर पुस्तक तैयार की थी और मुझे उसके विमोचन का आमंत्रण आया था। बात लक्ष्मण और उर्मिला की थी, इसीलिए मैं वहां गया भी। आज की पीढ़ी से इस कहानी को जोड़ने के लिए इस पुस्तक का नाम भी उन्होंने ‘लक्ष्मिला’ रखा था।’

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सुनील लहरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बातों बातों में जिक्र अयोध्या के राम मंदिर का भी चला तो सुनील लहरी कहते हैं, ‘मुझे तो रामलला के पिछली बार अद्भुत दर्शन हुए थे। वहां के पुजारियों ने मेरा बहुत सम्मान भी किया था। मुझे वे सारी वस्तुएं भी दिखाई गई थीं जो वहां मंदिर निर्माण में खुदाई के दौरान निकली थीं। राम में मेरी वैसी ही अट्टू श्रद्धा है जैसी कि लक्ष्मण की रामकथा में रही होगी। मेरी उनसे कभी कुछ अपेक्षा न रहती है और न होनी चाहिए। सुमित्रा ने अपने एक बेटे को राम की सेवा में और दूसरे को भरत की सेवा में जन्मते ही लगा दिया था, और अपनी मां का ये संकल्प पूरा करने में ही सुमित्रा के दोनों बेटों ने अपना जीवन बिता दिया।’
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सुनील लहरी - फोटो : सोशल मीडिया
तो क्या अयोध्या के श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण न मिलने से उन्हें किसी तरह का क्षोभ नहीं हुआ? इस प्रश्न पर सुनील लहरी आहत से दिखते हैं, लेकिन वह कहते हैं, ‘हो सकता है इस कार्यक्रम के आयोजकों को श्रीराम कथा में लक्ष्मण की प्रासंगिकता अब नजर न आती हो। लेकिन, ये उनका अपना निर्णय है। अमिताभ बच्चन के घर अगर शादी हो और वह आमंत्रण न भेजें तो भला मेरे नाराज होने का क्या ही औचित्य है, ऐसे ही अयोध्या के कार्यक्रम में अगर मुझे नहीं बुलाया गया तो इसमें भी रामजी की ही कोई न कोई कृपा जरूर होगी।’
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