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Vipul Shah Exclusive: ‘द केरल स्टोरी’ पर विवाद की जरूरत ही नहीं, हमने सिर्फ वही दिखाया जो केरल में होता आ रहा

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विपुल अमृतलाला शाह - फोटो : Amar Ujala
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‘आंखें’, ‘वक्त’, ‘सिंह इज किंग’, ‘फोर्स’ और ‘कमांडो’ जैसी फिल्में बनाने वाले निर्माता-निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह की पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ इन दिनों खूब चर्चा में हैं। उनकी इस साल रिलीज फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ को लेकर भी विमर्श चल ही रहा है और इस बीच विपुल अपनी अगली फिल्म पर काम शुरू कर चुके हैं। ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने इन्हीं मुद्दों पर विपुल शाह से उनके कार्यालय में ये एक्सक्लूसिव मुलाकात की।
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विपुल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘द केरल स्टोरी’ के दूरदर्शन पर प्रसारण को लेकर चल रहे विवाद पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
सिनेमाघरों में ब्लॉकबस्टर हिट हो चुकी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ पहले से ही ओटीटी पर उपलब्ध है। लेकिन, ये सिर्फ वयस्कों के लिए है। इस फिल्म के ओटीटी पर आने के बाद देश-दुनिया के कई संगठनों और लोगों ने मुझसे संपर्क किया कि क्या इसका कोई ऐसा संस्करण भी है जिसे हम अपने किशोरवय बच्चों को दिखा सकें। हमने इसका सैटेलाइट संस्करण भी बनाया ही था। दूरदर्शन ने हमसे संपर्क किया कि क्या इसे हम दिखा सकते हैं, तो हमने यही कहा कि हमें इसमें क्या ही आपत्ति हो सकती है।
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विपुल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मेरा प्रश्न इसे केरल में कुछ ईसाई संगठनों द्वारा समूह में दिखाए जाने से है...
ये बहुत ही रोचक पहलू है इस फिल्म का। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ लव जिहाद की बात करती है कि कैसे एक हिंदू युवती को कुछ मुस्लिम युवक बहला फुसलाकर विदेश ले जाते हैं और एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के हवाले कर देते हैं। हालांकि ये चार लड़कियों की कहानी है और इसमें एक युवती ईसाई भी है लेकिन मुख्य कहानी एक हिंदू युवती की सच्ची घटना पर ही आधारित है। केरल का ईसाई समूह भी इन घटनाओं से भयभीत है, ये उनकी इस पहल से साबित होता है।

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विपुल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अब इस पर प्रतिबंध लगाने की बात हो रही है?
इतिहास में फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की परंपरा पहले से ही रही है। ‘किस्सा कुर्सी का’ और ‘आंधी’ पर प्रतिबंध इसका उदाहरण हैं। ऐसे में अब फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ पर प्रतिबंध की मांग उठना कोई नई बात नहीं है। सत्ता में कोई भी रहा हो, ऐसा हमेशा से ही होता आया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमें हमारा संविधान देता है।
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विपुल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आप मानते हैं कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ समाज के एक खास वर्ग पर निशाना साधती है?
मैं ये पहले भी कह चुका हूं और फिर दोहरा रहा हूं, फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। हमने किसी वर्ग को निशाना बनाने या उनके विरुद्ध कोई जनभावना बनाने के लिए ये फिल्म नहीं बनाई। जो कुछ केरल राज्य में बरसों से होता आ रहा है, हमने उस पर शोध किया और ये फिल्म बनाई। हमें किसी खास वर्ग को निशाना ही बनाना होता तो हम ‘द केरल स्टोरी पार्ट 2’ बनाते, ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ नहीं बनाते।
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विपुल शाह{ वंदे वीरम गाना के लॉन्च पार्टी में} - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ में नक्सलियों का जो नायक दिखाया गया है, वैसा ही एक नक्सली नेता पुलिस ने बीते दिन मुठभेड़ में मार गिराया है। अपनी इस फिल्म से आप कितना संतुष्ट हैं?
फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ की रिलीज से पहले और रिलीज के बाद मुझे कई लोगों ने कहा और काफी दबाव रहा मुझ पर कि मैं इस फिल्म के खलनायक और उसकी दो महिला सहयोगियों को मुस्लिम नाम दे दूं। लेकिन, मैंने ऐसा नहीं किया। ये फिल्म भी कुछ सच्ची घटनाओं पर आधारित है। ऐसे में फिल्म के खलनायक का नाम मैं सिर्फ कुछ लोगों को संतुष्ट करने के लिए या पैसे कमाने के लिए मुस्लिम कर दूं, ये मुझसे नहीं हो सकता था। मैंने इन सुझावों और दबावों को नहीं माना और जो सच्ची बातें हैं, वही इस फिल्म में दिखाई।
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विपुल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपको लगता है कि फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ का खलनायक अगर मुस्लिम होता तो फिल्म के बॉक्स ऑफिस नतीजे कुछ और होते?
हो सकता है। लेकिन, फिर ये मेरी अपने पेशे को लेकर ईमानदारी नहीं होती। ये सच है कि सिनेमा ने हाल के दिनों में एक खास नैरेटिव बनाया है और मुस्लिम खलनायक की बड़े परदे पर धुलाई होने पर लोग तालियां भी बजाते रहे हैं। लेकिन, एक फिल्मकार की जिम्मेदारी है कि वह अगर सच्ची घटना पर फिल्म बनाने की बात कर रहा है तो फिर उसमें सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के लिए ही छेड़छाड़ न करे। फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ को जितने भी लोगों ने देखा, सबने तारीफ की। ये बात और है कि दर्शक इन दिनों एक खास तरह की फिल्म देखना चाहते हैं, इस पर हमारा जोर नहीं है।

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विपुल शाह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ की रिलीज से पहले आपने कुछ फिल्मों का एलान किया था, उसमें से कौन सी फिल्म आप सबसे पहले शुरू करने जा रहे हैं?
अपनी अगली फिल्म का निर्देशन मैं खुद कर रहा हूं। बैंक डकैती जैसी ये कहानी एक सस्पेंस थ्रिलर है। इसकी शूटिंग मैं जुलाई में शुरू करने की योजना बना रहा हूं। फिल्म के मुख्य कलाकारों का चयन करीब करीब पूरा हो चुका है। अरसे से लोग मुझसे मेरी फिल्म ‘आंखें’ का सीक्वल बनाने की मांग करते रहे हैं, ये फिल्म ‘आंखें’ का सीक्वल तो नहीं है लेकिन ये है उसी श्रेणी की फिल्म।

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