परमवीर सिंह चीमा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब घर परिवार का आपको पूरा सहयोग मिला?
बिल्कुल, मेरे पिता पिता सर्वजीत सिंह चीमा किसान हैं। जालंधर से 25 किलोमीटर दूर करतारपुर एक जगह है वहां पर हमारी खेती है। पिता जी ने भी वकालत की पढाई की है, लेकिन उन्होंने कभी वकालत की प्रैक्टिक्स नहीं की। पापा की ही इच्छा थी कि पहले वकालत की पढाई पूरी कर लूं, उसके बाद वह कभी नहीं पूछेंगे कि जीवन में क्या कर रहा हूं। मेरी सगी मां की मृत्यु बचपन में हो गई थी, मेरी दूसरी मां मुझे हरपीत कौर सगे बेटे से भी बढ़कर प्यार करती हैं।