बंदिश बेंडिट्स रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी सिनेमा की मेकिंग की तरह ही देश में हिंदी ओटीटी की सामग्री भी होती जा रही है। मुट्ठी भर लोग नेटफ्लिक्स से लेकर प्राइम वीडियो, वूट, सोनी लिव और दूसरे ओटीटी पर चक्कर लगाते दिखने लगे हैं। नए खेमे बन रहे हैं। नए समीकरण बन रहे हैं और गनीमत है कि जी5 जैसे ओटीटी अब भी इस ठहरते जा रहे पानी में हलचल पैदा करने में सफल हो रहे हैं। ‘बंदिश बैंडिट्स’ में हालांकि नायक नायिका के किरदार करने वाले कलाकरों ऋत्विक भौमिक और श्रेया चौधरी ने अपनी तरफ से पूरी मेहनत की है दर्शकों से एक रिश्ता बना पाने की। लेकिन, उनके किरदार उतने जटिल हैं नहीं जितने सतह पर नजर आते हैं। दर्शक इस सीरीज में नसीरुद्दीन शाह, अतुल कुलकर्णी और राजेश तेलंग जैसे सीनियर कलाकारों में कुछ बम, पटाखे, फुलझड़ियां तलाशते रहते हैं, इनकी अदाकारी में दम भी दिखता है लेकिन, किरदारों के विस्तार में मामला फुस्स हो जाता है।