उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के पास अमरोहा से निकला कोई व्यक्ति सिनेमा के शहर बंबई (अब मुंबई) पहुंचकर न सिर्फ अपने मां-बाप का नाम रौशन करेगा बल्कि पूरे अमरोहा की शान बनकर दुनिया में चमक जाएगा, आज से 50 साल पहले किसने सोचा होगा। न तब इतने अखबार थे और न ही इतने टीवी चैनल व सोशल मीडिया। लेकिन, कमाल अमरोही तब भी सुर्खियों में कायम रहे जब अखबार व पत्रिकाएं गिनती की होती थीं और अब भी सुर्खियों में बने हुए हैं, जब उनकी बनाई भारत की पहली सिनेमास्कोप रंगीन फिल्म ‘पाकीज़ा’ की रिलीज के आज 49 साल पूरे हो रहे हैं। कुछ साल पहले एक मुलाकात में ताजदार अमरोही ने कहा था, ‘फिल्म ‘पाकीज़ा’ के बिना भारतीय सिनेमा का इतिहास अधूरा है।’ उनकी कही ये बात सोलह आने सही है और उनके पिता कमाल अमरोही की सिनेमा से मोहब्बत की अमिट निशानी है। ये और बात है कि इसी फिल्म के दौरान उनका अपनी माशूक मंजू (मीना कुमारी) से अलगाव हुआ। दोनों अलग अलग रहे लगे। और, इसी फिल्म को पूरा करने के लिए बरसों बाद दोनों मिले। फिल्म पूरी हुई। दोनों ने प्रीमियर पर साथ देखी और इसके बाद कमाल अमरोही की मंजू ने बस एक ही बात उनसे कही, ‘वादा करो, चांद! अब तुम दूसरी कोई फिल्म न बनाओगे।’