वास्तव
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
इम्तियाज हुसैन के संवादों का कमाल
महेश मांजरेकर की फिल्म ‘वास्तव’ संजय दत्त के कमाल के अभिनय की वजह से तो जानी ही जाती है, इस फिल्म में महेश की मराठी मंडली के तमाम कलाकारों ने अद्भुत अभिनय किया है। संजय नार्वेकर इसी फिल्म में पहली बार डेढ़ फुटिया के रोल में नजर आए और संजय दत्त के साथ बनी उनकी केमिस्ट्री ने फिल्म को बहुत फायदा पहुंचाया। इसके अलावा नम्रता शिरोडकर, परेश रावल और मोहनीश बहल ने भी बढ़िया काम किया। लेकिन, जो कलाकार इस फिल्म में संजय दत्त पर भी भारी पड़ा, वह रहीं रीमा लागू। मां के किरदार में जो तड़प, जो वेदना और जो लाचारी रीमा लागू ने परदे पर दिखाई, वैसे मां के किरदार हिंदी सिनेमा में गिनती के देखने को मिले हैं। फिल्म में संजय दत्त और रीमा लागू के सारे सीन गजब के हैं लेकिन क्लाइमेक्स के अलावा जो एक सीन लोगों को अब भी याद है, वह था पचास तोले वाला सीन। बेटा मां को अपनी तरक्की सोने की कमाई से गिनवा रहा है और मां सोच रही है कि बेटे ने पैसा तो खूब कमाया पर बेटा कहलाने का हक खो दिया। फिल्म के संवाद लिखे थे इम्तियाज हुसैन ने और इसके संवाद बरसों तक लोगों को जुबानी याद रहे।